सरकार छोटे उद्यमों के लिए ईसीएलजीसी जैसी कर्ज गारंटी योजना लाने पर कर रही विचार

सरकार छोटे उद्यमों के लिए ईसीएलजीसी जैसी कर्ज गारंटी योजना लाने पर कर रही विचार

सरकार छोटे उद्यमों के लिए ईसीएलजीसी जैसी कर्ज गारंटी योजना लाने पर कर रही विचार
Modified Date: April 15, 2026 / 06:45 pm IST
Published Date: April 15, 2026 6:45 pm IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) सूक्ष्म, लघु एवं मझोला उद्यम मंत्रालय पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच एमएसएमई को सहायता प्रदान करने के लिए ईसीएलजीएस जैसी ऋण गारंटी योजना की संभावनाओं पर विचार करने के लिए वित्तीय सेवा विभाग के संपर्क में है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के लिए ऋण गारंटी योजना पर विचार किए जाने के संबंध में संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में, एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रजनीश ने कहा, ‘‘हम आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) जैसी व्यवस्था के संबंध में वित्तीय सेवा विभाग के साथ निरंतर संपर्क में हैं। उचित समय आने पर मैं इस बारे में और अधिक जानकारी साझा कर पाऊंगा।’’

ईसीएलजीएस मई, 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न बाधाओं के संदर्भ में पात्र एमएसएमई को उनकी परिचालन देनदारियों को पूरा करने और अपने कामकाज को पुनः आरंभ करने में सहायता प्रदान करना था। इस योजना के दायरे में सभी क्षेत्र शामिल हैं।

रजनीश ने कहा कि मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी घरेलू थोक और कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए एमएसएमई संगठनों और राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) के साथ लगातार संपर्क में हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन महीनों में एक लाख टन से अधिक कच्चा माल उपलब्ध कराया गया है। अगर हम मार्च के आंकड़ों को सालाना आधार पर देखें तो इसमें 12.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’

पश्चिम एशिया घटनाक्रमों पर अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रजनीश ने कहा कि एमएसएमई मंत्रालय सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है। एमएसएमई को समर्थन देने के लिए मंत्रालय स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय केंद्र, राज्य और उप-राज्य स्तर पर सभी एमएसएमई संगठनों के साथ नियमित रूप से परामर्श बैठकें कर रहा है और मंत्रालय के सभी क्षेत्रीय कार्यालय उनसे लगातार संपर्क में हैं।

अतिरिक्त सचिव ने कहा, ‘‘वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, फरवरी और मार्च में मंत्रालय के उद्यम पोर्टल पर 20 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों ने पंजीकरण कराया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में पंजीकृत एमएसएमई की कुल संख्या आठ करोड़ से अधिक हो गई है। यह भारत के एमएसएमई क्षेत्र की मजबूती का संकेत है।’’

रजनीश ने कहा, ‘‘सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों में कर्ज प्रवाह हमारे प्रमुख कार्यक्षेत्रों में से एक है और मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि छोटे उद्यमों के पास बकाया ऋण 36.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। पिछली तिमाही, जनवरी, फरवरी और मार्च में, छोटे उद्यमों को दिए गए ऋण प्रवाह में 23.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’

उन्होंने यह भी बताया कि आरबीआई ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी है। यह एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘फरवरी और मार्च में, हमने सूक्ष्म और लघु उद्यमों को कुल 5.27 लाख से अधिक की ऋण गारंटी दी है। इन ऋण गारंटियों का कुल मूल्य 92,000 करोड़ रुपये से अधिक है।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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