नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) सरकार बागान क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों को और उदार बनाने पर विचार कर रही है। इसके तहत केले जैसी अन्य वाणिज्यिक फसलों को भी एफडीआई के दायरे में लाया जा सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय इस मुद्दे पर संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘‘हम केले जैसे बागान क्षेत्र में एफडीआई को और उदार बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।’’
फिलहाल चाय, कॉफी, रबड़, इलायची, पाम और जैतून के पेड़ों के बागान में स्वत: मंजूर मार्ग से 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति है। इनके अलावा अन्य बागान गतिविधियों में एफडीआई की अनुमति नहीं है।
भारत ने अप्रैल, 2000 से मार्च, 2026 के बीच चाय और कॉफी क्षेत्र में 29.52 करोड़ डॉलर तथा रबड़ उत्पादों में 3.93 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल किया है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक देश है और हर साल तीन करोड़ टन से अधिक केले का उत्पादन करता है। इसके बावजूद वैश्विक केला निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी करीब एक प्रतिशत ही है। देश विश्व के कुल केला उत्पादन में लगभग 26.45 प्रतिशत का योगदान देता है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 37.75 करोड़ डॉलर मूल्य के केले का निर्यात किया, जो इससे पिछले वर्ष की तुलना में करीब 30 प्रतिशत अधिक है। सरकार आने वाले वर्षों में केला निर्यात बढ़ाकर एक अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है।
भारतीय केले के प्रमुख निर्यात बाजारों में ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, उज्बेकिस्तान, सऊदी अरब, नेपाल, कतर, कुवैत, बहरीन, अफगानिस्तान और मालदीव शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, चीन, नीदरलैंड, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों में भी भारतीय केले के लिए निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं।
देश में केले का सबसे अधिक उत्पादन आंध्र प्रदेश में होता है। इसके बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का स्थान है। वर्ष 2022-23 में इन पांच राज्यों का देश के कुल केला उत्पादन में करीब 67 प्रतिशत का हिस्सा था।
भाषा अजय
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