एनएमडीसी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कोयले का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेगी : चेयरमैन

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एनएमडीसी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कोयले का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेगी : चेयरमैन

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  • Publish Date - September 6, 2026 / 11:42 AM IST,
    Updated On - September 6, 2026 / 11:42 AM IST

(अभिषेक सोनकर)

नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनी एनएमडीसी अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में तापीय कोयले का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेगी। कंपनी का चालू वित्त वर्ष (2026-27) में करीब 10 लाख टन कोयला बेचने का लक्ष्य है। कंपनी के चेयरमैन अमिताव मुखर्जी ने यह जानकारी दी।

इस्पात मंत्रालय के तहत आने वाली हैदराबाद मुख्यालय वाली एनएमडीसी देश की सबसे बड़ी लौह अयस्क खनन कंपनी है और भारत की लौह अयस्क जरूरत का करीब 20 प्रतिशत पूरा करती है।

मुखर्जी ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि कंपनी ने वर्ष 2030 तक खनन कारोबार में विविधता लाने की योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य सरकार के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में योगदान देना और देश में बढ़ती औद्योगिक जरूरतों के लिए विभिन्न खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा, “फिलहाल हम 99.9 प्रतिशत लौह अयस्क कंपनी हैं। हमारा लक्ष्य देश के बढ़ते उद्योगों की अधिकतम खनिज जरूरतों को पूरा करने में मदद करना है।”

उन्होंने बताया कि एनएमडीसी इस वित्त वर्ष में झारखंड स्थित टोकीसुद नॉर्थ कोयला खदान से तापीय कोयले का वाणिज्यिक खनन शुरू करेगी। कंपनी इस खदान से वित्त वर्ष 2026-27 में अधिकतम 10 लाख टन कोयला संभावित खरीदारों को बेचने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि उत्पादन अगली तिमाही से शुरू होने की उम्मीद है।

कंपनी वित्त वर्ष 2026-27 में एक अन्य कोकिंग कोयला ब्लॉक का विकास भी शुरू करेगी और यहां से वित्त वर्ष 2027-28 में उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है। तापीय कोयले का इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली उत्पादन में होता है, जबकि कोकिंग कोयला इस्पात निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

एनएमडीसी ने कोयला मंत्रालय की नीलामी में झारखंड के टोकीसुद नॉर्थ कोयला खदान और रोहने कोकिंग कोल ब्लॉक हासिल किए थे। टोकीसुद नॉर्थ में 5.2 करोड़ टन और रोहने ब्लॉक में 19.1 करोड़ टन भंडार है। दोनों खदानों की क्रमशः 23 लाख टन और 80 लाख टन की वार्षिक अधिकतम क्षमता है।

मुखर्जी ने कहा कि एनएमडीसी का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश की सबसे बड़ी खनिज खनन कंपनी बनना है। कंपनी भारत और विदेशों में विभिन्न खनिजों के खनन के अवसर तलाशती रहेगी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक कंपनी के कुल राजस्व में लौह अयस्क के अलावा अन्य खनिजों की हिस्सेदारी कम से कम 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य है।

एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 31,554 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड कुल राजस्व दर्ज किया, जो 2024-25 के 23,668 करोड़ रुपये से 33 प्रतिशत अधिक है।

लौह अयस्क कारोबार के बारे में मुखर्जी ने कहा कि कंपनी वर्ष 2030 तक सालाना 10 करोड़ टन लौह अयस्क उत्पादन के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में एनएमडीसी ने रिकॉर्ड 5.3 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन किया, जो पिछले वित्त वर्ष के 4.4 करोड़ टन से करीब 20 प्रतिशत अधिक है।

एनएमडीसी छत्तीसगढ़ के बैलाडीला और कर्नाटक के डोनिमलाई क्षेत्रों में चार प्रमुख अत्याधुनिक लौह अयस्क खनन परिसरों का संचालन करती है।

भाषा अजय अजय

अजय