नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) विभिन्न सरकारी विभागों ने इस साल मार्च से जुलाई के दौरान सोशल मीडिया मंचों से करीब 2.44 लाख सामग्रियों को हटाने के लिए कहा। एक आधिकारिक नोट में बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी गई।
प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की तरफ से संचालित तथ्य-जांच इकाई ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मध्यस्थ दिशानिर्देश नियम, 2021 में फरवरी में संशोधन किया गया था, जिसके बाद गैरकानूनी सामग्री हटाने के अनुरोध पर कार्रवाई की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर तीन घंटे कर दी गई।
पीआईबी फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘मार्च-जुलाई, 2026 के दौरान करीब 2.98 लाख यूआरएल हटाने के लिए भेजे गए, जिनमें से 2.44 लाख यानी 82 प्रतिशत राज्यों की ओर से भेजे गए थे। इनमें से 51 हजार यूआरएल को भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने साइबर अपराध, बुनियादी ढांचे और शेयर बाजार में निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी के संदर्भ में भेजा था।’’
इन सामग्रियों को हटाने की अवधि के दौरान ही नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में छात्रों के व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए थे।
कई राजनीतिक नेताओं, सोशल मीडिया की शख्सियतों और अन्य लोगों ने कहा था कि सोशल मीडिया मंचों, खासकर मेटा के इंस्टाग्राम पर उनकी सामग्री को ब्लॉक किया जा रहा था।
सरकार की तथ्य-जांच इकाई ने कहा कि पिछले दो वर्षों में आई4सी की ओर से सोशल मीडिया से हटाने के लिए भेजी गई अधिकांश गैरकानूनी सामग्री अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (सीएसएएम) और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराधों से संबंधित थी।
पीआईबी फैक्ट चेक ने सरकार की तीन घंटे की समयसीमा के अनुपालन के लिए मेटा द्वारा सामग्री हटाने की प्रक्रिया को स्वचालित किए जाने संबंधी हालिया खबरों के बीच ये आंकड़े साझा किए।
तथ्य-जांच इकाई ने इस खबर को भ्रामक बताते हुए कहा कि मेटा के साथ एपीआई एकीकरण वर्ष 2025 में उसी के अनुरोध पर किया गया था।
इकाई ने कहा कि भारत में करीब 60 करोड़ उपयोगकर्ता हैं और हर 68 सेकंड में 78,703 तक सामग्री सोशल मीडिया में पोस्ट की जाती है। ऐसे में किसी सामग्री के गैरकानूनी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि सरकार और उसकी एजेंसियां साइबर क्षेत्र में कानून का उल्लंघन करने वालों को खुली छूट नहीं दे सकती हैं। उसके मुताबिक, सोशल मीडिया मंच सक्षम प्राधिकारियों की ओर से भेजे गए अनुरोधों पर कार्रवाई करते हैं।
इकाई ने कहा कि संबंधित मंत्रालय या राज्य सरकार की ओर से अधिसूचित केवल अधिकृत अधिकारी ही ‘सहयोग’ मंच के जरिये गैरकानूनी सामग्री हटाने का अनुरोध भेज सकते हैं और ऐसे सभी अनुरोधों की संबंधित सरकारें समय-समय पर समीक्षा करती हैं।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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