सरकार ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए दूसरी वैश्विक निविदा जारी की
सरकार ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए दूसरी वैश्विक निविदा जारी की
नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) वैश्विक कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद सरकार ने खरीफ सत्र के लिए घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के उद्देश्य से 17 लाख टन यूरिया के आयात के लिए दूसरी वैश्विक निविदा जारी की है। उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उर्वरक मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रमों पर आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि यूरिया की वैश्विक कीमत फरवरी में 447 डॉलर प्रति टन से बढ़कर अब 947 डॉलर प्रति टन हो गई है।
देश ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के स्रोतों से 25 लाख टन यूरिया और 50 लाख टन डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) हासिल किया है, जिसकी खेप जून-जुलाई में पहुंचने की उम्मीद है।
शर्मा ने कहा, ‘‘हमने 17 लाख टन यूरिया के लिए एक वैश्विक निविदा भी जारी की है, जिस पर अभी काम चल रहा है… यह खरीफ सत्र के लिए दूसरी निविदा है। इस वैश्विक निविदा में कीमत अभी तय होना बाकी है।’’
पश्चिम एशिया संकट के बीच, घरेलू उर्वरक उत्पादन 104.81 लाख टन रहा, जबकि आयात 27.62 लाख टन रहा। इस प्रकार कुल उपलब्ध उर्वरक की मात्रा बढ़कर लगभग 132.43 लाख टन हो गई।
अल नीनो के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए, कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों के परामर्श से उर्वरक की मांग के अनुमानों को संशोधित करते हुए उन्हें कम कर दिया है।
उन्होंने आगे बताया कि खरीफ 2026-27 सत्र के लिए यूरिया की मांग 194 लाख टन अनुमानित की गई है, जो पहले के अनुमान से चार लाख टन कम है। वहीं, डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की मांग में 6 लाख टन की कटौती करते हुए इसे 60 लाख टन निर्धारित किया गया है।
भारत के कुछ हिस्सों में खरीफ (गर्मी) की बुवाई अभी शुरू हुई है, लेकिन यह अभी भी बहुत शुरुआती चरण में है। जिन क्षेत्रों में मानसून-पूर्व वर्षा हो चुकी है, वहां किसानों ने जल्दी बुवाई (विशेष रूप से दलहनों, मोटे अनाजों और कुछ कपास जैसी कम अवधि वाली फसलों की) के लिए खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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