नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को वैश्विक विनिर्माण के लिए एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करते हुए चिप बनाने वाली कंपनियों से बृहस्पतिवार को कहा कि उनकी सरकार देश को सेमीकंडक्टर क्षेत्र का पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है।
मोदी ने यहां ‘सेमीकॉन इंडिया सम्मेलन’ के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘‘दुनिया नए और भरोसेमंद विनिर्माण केंद्रों की तलाश कर रही है। भारत इस जरूरत को पूरा करने के लिए लगातार खुद को तैयार कर रहा है। भारत सेमीकंडक्टर उद्योग का पसंदीदा गंतव्य बनने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहा है।’’
प्रधानमंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत में बने चिप पहली बार ग्राहकों तक पहुंचने लगे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अब भारत के संयंत्रों से निकलने वाले हमारे चिप देश और दुनिया में ग्राहकों तक पहुंचने लगे हैं।’’
मोदी ने आर्थिक गति की व्यापक तस्वीर पेश करते हुए पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि, जापान की एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा हाल में भारत की रेटिंग बढ़ाए जाने और इस महीने भारत की मेजबानी में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए नयी दिल्ली घोषणापत्र का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत की अर्थव्यवस्था बढ़ रही है और दूसरी ओर दुनिया का भारत पर भरोसा भी बढ़ रहा है।’’
मोदी ने 2022 में मिशन की शुरुआत के बाद से परिवेश के तेजी से विस्तार में सम्मेलन में मौजूद उद्योग जगत के लोगों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, ‘‘आप भारत की इस सफलता के स्तंभ हैं, आप साझेदार हैं।’’
उन्होंने 2022 में कार्यक्रम शुरू होने के बाद से भारत के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र नीतियां बनाने और परियोजनाओं की योजना तैयार करने के चरण से आगे बढ़कर प्रायोगिक उत्पादन और वाणिज्यिक विनिर्माण तक पहुंच गया है। भारत में विनिर्मित चिप देश और विदेश के ग्राहकों तक पहुंचने लगे हैं, जबकि मोहाली और सूरत में नए संयंत्रों में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर परिवेश विकसित करने के लिए चिप डिजाइन, उपकरण, सामग्री, परीक्षण और पैकेजिंग सहित कई क्षेत्रों में क्षमता विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने उद्योग जगत से घरेलू अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने का आग्रह किया और विदेश में काम कर रहे भारतीय शोधकर्ताओं से देश में उन्नत प्रौद्योगिकी के विकास में योगदान देने को कहा।
मोदी ने कहा, ‘‘भारत में अनुसंधान कर रहे युवा प्रतिभाओं को आगे आना चाहिए और विदेश में नवोन्मेष में शामिल युवाओं को भी भारत में उन्नत प्रौद्योगिकियों के विकास में शामिल होना चाहिए।’’
उन्होंने सेमीकंडक्टर कंपनियों से भारतीय संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान साझेदारी बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि उद्योग के नेतृत्व में अधिक अनुसंधान एवं विकास से कंपनियों और देश के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कार्यबल, दोनों को लाभ होगा।
मोदी ने कहा कि सरकार अपने सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ा रही है और उसने ऐसे नियामकीय बदलाव किए हैं जिनका उद्देश्य वैश्विक कंपनियों, स्टार्टअप तथा डिजाइन कंपनियों के बीच सहयोग को सुगम बनाना है।
सरकार ने ‘सेमीकॉन इंडिया’ कार्यक्रम के दूसरे चरण को 1.275 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ जुलाई में मंजूरी दी थी।
प्रधानमंत्री ने अधिक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला की भी जरूरत बताई। इसमें अधिक फैबलेस सेमीकंडक्टर कंपनियां, स्थानीय स्तर पर विकसित बौद्धिक संपदा और कृत्रिम मेधा (एआई) के बुनियादी ढांचे के लिए ‘सिलिकॉन फोटोनिक्स’ का अधिक इस्तेमाल शामिल है।
उन्होंने सेमीकंडक्टर उपकरण, रसायन, गैस और सामग्री बनाने वाली कंपनियों से भारत में अपना कारोबार बढ़ाने का आग्रह किया और कहा कि देश के पास सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला वाला परिवेश तैयार करने का अवसर है।
मोदी ने भारत के इंजीनियरिंग कार्यबल को एक प्रमुख लाभ बताते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य चिप डिजाइन और संबंधित क्षेत्रों में एक लाख इंजीनियरिंग छात्रों को प्रशिक्षित करना है। करीब 70,000 लोगों को पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार को भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों खासकर कृत्रिम मेधा (एआई) डेटा केंद्रों और उन्नत विनिर्माण संयंत्रों की जरूरतों से से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग और औद्योगिक उत्पादन की जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर और परमाणु ऊर्जा सहित बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ा रहा है।
‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ विषय पर आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। इसमें सेमीकंडक्टर कंपनियां, नीति निर्माता, निवेशक, शिक्षाविद और स्टार्टअप हिस्सा ले रहे हैं।
मोदी ने कहा कि भारत की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमता से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं मजबूत होंगी और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से देश में अपना कारोबार और साझेदारियां बढ़ाने का आह्वान किया।
भाषा निहारिका रमण
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