(फिलेम दीपक सिंह)
नागोया, 17 सितंबर (भाषा) एशियाई खेलों के लिए यहां बहुचर्चित कोस्टा सेरेना क्रूज जहाज में ठहरे कुछ भारतीय खिलाड़ियों को दो लोगों के लिए बने कमरे में तीन खिलाड़ियों को साथ रहना पड़ रहा है। उद्घाटन समारोह से महज दो दिन पहले आवास व्यवस्था को लेकर मेजबान जापान के खिलाड़ियों को भी ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक कुछ जापानी खिलाड़ी वैकल्पिक आवास की तलाश कर रहे हैं। ऐसे मामले भी सामने आए हैं जिनमें पुरुष और महिला खिलाड़ियों को साझा कमरे आवंटित किए गए हैं।
जापान के उप मिशन प्रमुख हिसाशी मिजुतोरी ने यहां मीडिया से कहा, ‘‘ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कोच, टीम अधिकारियों और खिलाड़ियों को एक ही कमरे में रखा गया है। कुछ मामलों में केवल संख्या के आधार पर कमरे आवंटित किए गए, जैसे पांच पुरुषों और पांच महिलाओं के समूह को दो लोगों के पांच कमरे देना।’’
‘जापान टाइम्स’ के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘कागज पर संख्या सही बैठती है लेकिन व्यावहारिक तौर पर इससे पुरुषों और महिलाओं को एक साथ रखने, कोच को खिलाड़ियों के साथ रखने या बड़ी मात्रा में चिकित्सा उपकरण रखने वाले ट्रेनर को एक साथ रखने जैसी मुश्किल स्थितियां पैदा होती हैं।’’
भारत के रोइंग, वुशु और टेबल टेनिस दल के खिलाड़ी पहले ही इटली के क्रूज जहाज में पहुंच चुके हैं जो फिलहाल आवास व्यवस्था को लेकर चर्चा के केंद्र में है। करीब 300 मीटर लंबे इस जहाज में 1,500 केबिन हैं।
भारतीय दल के एक सदस्य के अनुसार दो खिलाड़ियों के लिए बने कुछ कमरों में तीन खिलाड़ी रह रहे हैं। कमरे छोटे होने के कारण अतिरिक्त खिलाड़ी के रहने से असुविधा बढ़ गई है लेकिन वे औपचारिक रूप से शिकायत नहीं कर रहे हैं।
भारतीय दल के एक सदस्य ने नाम नहीं बताने की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘‘दो खिलाड़ियों के लिए बने कुछ कमरों में तीन खिलाड़ी रह रहे हैं। कमरे पहले ही छोटे हैं और एक अतिरिक्त खिलाड़ी के कारण असुविधा और बढ़ जाती है। खिलाड़ी इतनी बड़ी प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहते हैं लेकिन उन्हें इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम शिकायत नहीं कर रहे हैं और स्थिति के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं। भोजन को लेकर कोई समस्या नहीं है।’’
यह भी पता चला है कि कुछ भारतीय अधिकारियों को अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करने को कहा गया है। भारतीय रोइंग टीम के सहयोगी स्टाफ के दो सदस्य क्रूज जहाज पर जगह नहीं मिलने के कारण बाहर ठहरे हुए हैं।
कुछ भारतीय खिलाड़ियों, विशेषकर रोइंग खिलाड़ियों को बुधवार को 12 घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा और उन्हें आधी रात से कुछ पहले कमरे मिले।
एक भारतीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘हम बुधवार सुबह करीब नौ बजे क्रूज जहाज के पंजीकरण क्षेत्र में पहुंचे। इसके बाद इंतजार करते रहे और आखिरकार लगभग आधी रात को अपने कमरों में जा सके।’’
भारतीय दल के मिशन प्रमुख सहदेव यादव ने पीटीआई से कहा कि आयोजकों की ओर से ‘कुप्रबंधन’ हुआ है और भारतीय ओलंपिक संघ इन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘उनकी ओर से कुछ कुप्रबंधन हुआ है लेकिन हम समस्या का समाधान कर रहे हैं। हम इस पर काम कर रहे हैं।’’
खबरों के मुताबिक थाईलैंड के खिलाड़ियों को भी बुधवार को क्रूज जहाज के स्वागत केंद्र में फर्श पर सोना पड़ा जिसके बाद वे अपने कमरों में पहुंच सके।
खेल गांव नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को रोजाना प्रशिक्षण के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।
रोइंग खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए क्रूज जहाज से करीब 30 किलोमीटर दूर नागरागावा इंटरनेशनल रेगाटा कोर्स जाना पड़ रहा है। टेबल टेनिस खिलाड़ियों को भी प्रशिक्षण के लिए लगभग 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।
एक अधिकारी ने कहा, ‘‘रोइंग खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए 30 किलोमीटर जाना पड़ता है और इसमें एक घंटे से अधिक समय लगता है।’’
वुशु खिलाड़ियों को भी क्रूज जहाज से 10 किलोमीटर से अधिक दूर आइची प्रांत मार्शल आर्ट्स हॉल में प्रशिक्षण के लिए करीब 30 मिनट बस यात्रा करनी पड़ती है।
करीब 200 कंटेनरनुमा लकड़ी के अस्थायी आवासों में विभिन्न देशों के लगभग 2,000 खिलाड़ियों को ठहराया गया है। ये मुख्य रूप से फुटबॉल, बास्केटबॉल, बेसबॉल, सॉफ्टबॉल, जिउ-जित्सु और कुराश के खिलाड़ियों के लिए हैं।
इन खेलों में भारत केवल कुराश में हिस्सा लेगा जिसकी शुरुआत 27 सितंबर से होगी।
उप मिशन प्रमुख अलकनंदा अशोक ने पीटीआई से कहा, ‘‘कुराश टीम वहीं (कंटेनर विला में) रहेगी। वे करीब 24 सितंबर को यहां पहुंचेंगे।’’
दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने पहले ही कंटेनरनुमा कमरों की आलोचना करते हुए उन्हें तंग बताया था।
हालांकि आइची-नागोया एशियाई खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष हिदेआकी ओमुरा ने कहा कि अस्थायी आवास आर्थिक रूप से व्यावहारिक खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकते हैं।
भाषा
सुधीर मोना
मोना