नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत तक सीमित रखने की दिशा में केंद्र सरकार अच्छी प्रगति पर है। संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 में यह बात कही गई।
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने राजकोषीय अनुशासन और वृद्धि के लिए टिकाऊ निवेश दोनों को संतुलित किया जिसकी वजह से उसका राजकोषीय मार्ग अन्य से अलग और प्रभावशाली दिखता है। इस प्रतिबद्धता के चलते इस वर्ष तीन रेटिंग एजेंसियों ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाया है।
इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 के दौरान कुल केंद्रीय व्यय में पूंजीगत खर्च का हिस्सा 12.5 प्रतिशत से बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गया जबकि जीडीपी के अनुपात में प्रभावी पूंजीगत व्यय लगभग 2.6 प्रतिशत से बढ़कर चार प्रतिशत हो गया।
समीक्षा में कहा गया कि राज्यों का राजस्व घाटा बढ़ने के बावजूद केंद्र सरकार ने राज्यों को पूंजीगत व्यय बनाए रखने के लिए विशेष सहायता देकर प्रोत्साहित किया। इसके अलावा कई राज्यों में बिना-शर्त नकद हस्तांतरण का विस्तार राजस्व व्यय बढ़ाने का कारण बना, जिससे राज्यों के स्तर पर राजकोषीय गुंजाइश और सार्वजनिक निवेश प्रभावित हुआ।
आर्थिक समीक्षा कहती है, “वित्त वर्ष में दिखे व्यापक रुझानों के आधार पर केंद्र सरकार राजकोषीय समेकन के अपने निर्धारित मार्ग पर है और वित्त वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा लक्ष्य को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य हासिल करने की राह पर है।”
नवंबर, 2025 तक, केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 62.3 प्रतिशत था।
समीक्षा के मुताबिक, बाजारों ने सरकार की राजकोषीय अनुशासन की प्रतिबद्धता को मान्यता दी है, जिससे सरकारी बॉन्ड प्रतिफल घटा है और भारत के सरकारी बॉन्ड पर अमेरिकी बॉन्ड के मुकाबले ब्याज दर का अंतर आधे से अधिक घट गया है। घटता प्रतिफल खुद ही वित्तीय प्रोत्साहन का काम करेगा।
समीक्षा में यह भी बताया गया कि वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार ने 4.8 प्रतिशत राजकोषीय घाटे का आंकड़ा हासिल कर 4.9 प्रतिशत के बजट लक्ष्य को भी पार कर लिया। वित्त वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटा 9.2 प्रतिशत था।
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प्रेम अजय
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