Economic Survey 2025-26, image source: loksabha tv
नयी दिल्ली: संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey 2025-26) पेश कर दिया गया है। यह दस्तावेज सिर्फ सरकार की आर्थिक तस्वीर नहीं दिखाता, बल्कि यह भी बताता है कि आने वाले समय में आम लोगों की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
Economic Survey महंगाई, रोजगार, आय, कर्ज और विकास हर मोर्चे पर आम आदमी के लिए कई अहम संकेत देता है। इस आर्थिक सर्वेक्षण में केंद्र सरकार ने मौजूदा वर्ष में 7.4 फीसदी की दर से अर्थव्यवस्था बढ़ने की बात कही है। जबकि आने वाले वर्ष यानी 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6.8 प्रतिशत से 7.2 फीसदी तक बढ़ सकती है।(Economic Survey 2025-26) ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस आर्थिक सर्वेक्षण में आम आदमी के लिए क्यों खास है।
नई श्रम संहिताओं का प्रभावी कार्यान्वयन संगठित रोजगार बढ़ाने और महिलाओं एवं अस्थायी कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। (Economic Survey 2025-26) संसद में बृहस्पतिवार को पेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 में यह बात कही गई। इसके साथ आर्थिक समीक्षा में निजी क्षेत्र के सहयोग और निवेश की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि चार श्रम संहिताएं 21 नवंबर, 2025 को अधिसूचित की जा चुकी हैं और इनसे जुड़े नियमों के भी अगले कुछ महीनों में आ जाने की संभावना है। (Economic Survey 2025-26) समीक्षा में कहा गया कि काम की बदलती परिभाषाओं को देखते हुए लचीली श्रम नीतियां और गतिशील नियम रोजगार बढ़ाने के साथ श्रमिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करेंगे।
आर्थिक समीक्षा में कंपनियों को अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करने, नीतियां अद्यतन करने, कार्यबल मॉडल का पुनर्मूल्यांकन और डिजिटल तैयारियों को बढ़ाने की सलाह दी गई है। (Economic Survey 2025-26) इसमें कहा गया है कि नई श्रम संहिताएं एक एकीकृत ढांचा पेश करती हैं लेकिन इस ढांचे को अपने रोजमर्रा के कामकाज से जोड़ने का काम निजी क्षेत्र की कंपनियों को ही करना होगा।
आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, ‘‘श्रम संहिताओं को लागू करना श्रम बाजार में आमूलचूल बदलाव की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। इस बदलाव के लिए निजी क्षेत्र के साथ समन्वय बिठाने और निवेश जुटाने की जरूरत होगी।’’ (Economic Survey 2025-26) समीक्षा में स्कूली स्तर से ही वाणिज्यिक और लक्षित कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है ताकि महिलाओं और युवाओं को उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्रों में रोजगार के लायक बनाया जा सके।
इसके मुताबिक, भारतीय श्रम बाजार में डिजिटलीकरण, हरित ऊर्जा की तरफ कदम और अस्थायी एवं ऑनलाइन मंचों से जुड़े रोजगार के कारण संरचनात्मक बदलाव देखे जा रहे हैं। (Economic Survey 2025-26) कोविड-19 महामारी के बाद रोजगार की मात्रा से अधिक कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। नई श्रम संहिताओं के तहत महिलाएं मातृत्व लाभ लेने के बाद घर से भी काम कर सकती हैं।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि असंगठित श्रमिकों को औपचारिक अर्थव्यवस्था के दायरे में लाने के प्रयासों पर भी जोर दिया गया है। (Economic Survey 2025-26) राष्ट्रीय पोर्टल ई-श्रम के माध्यम से जनवरी 2026 तक 31 करोड़ असंगठित श्रमिक पंजीकरण करा चुके हैं जिनमें 54 प्रतिशत महिलाएं हैं। हरेक पंजीकृत श्रमिक को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) दिया गया है, जो आधार और मोबाइल से जुड़ा है।
चार श्रम संहिताओं ने केंद्र के 29 कानूनों को समेकित किया है और सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाया है। (Economic Survey 2025-26) भविष्य में गणना-पद्धति से जुड़ी पारदर्शिता और श्रमिक-अनुकूल प्रथाओं को सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।