नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) डेटा केंद्रों से बिजली की मांग में भारी उछाल के कारण दुनिया को जल्द ही तांबे की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।
बृहस्पतिवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में यह चेतावनी देते हुए कहा गया है कि ‘महत्वपूर्ण खनिज’ वैश्विक ऊर्जा रूपांतरण की राह में रणनीतिक बाधा बन गए हैं।
समीक्षा के अनुसार, ‘‘वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन अब केवल प्रौद्योगिकी पर निर्भर नहीं है, बल्कि इस बात से तय हो रहा है कि महत्वपूर्ण खनिजों पर किसका नियंत्रण है।’’
दस्तावेज में कहा गया है कि लिथियम, कोबाल्ट, निकल, तांबा और ‘दुर्लभ तत्व’ से खनिज रणनीतिक बाधा बन गए हैं। ये धातुएं न केवल कम कार्बन वाली अर्थव्यवस्था को आकार दे रही हैं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक शक्ति को भी प्रभावित कर रही हैं। रिपोर्ट में खनिज उत्पादक देशों द्वारा इनके निर्यात पर लगाए जा रहे व्यापारिक प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया गया है।
समीक्षा में कहा गया है कि इंडोनेशिया, कॉन्गो और चिली जैसे देशों में खनन संबंधी व्यवधानों के कारण तांबे की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर बिजली क्षेत्र और डेटा केंद्रों की बढ़ती मांग और व्यापारिक संरक्षणवाद को देखते हुए मध्यम से लंबी अवधि में तांबे की आपूर्ति में कमी की आशंका बढ़ गई है।
भाषा सुमित अजय
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