खाद्य तेल के पैक आकारों के मानकीकरण की तैयारी में सरकार, पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद

खाद्य तेल के पैक आकारों के मानकीकरण की तैयारी में सरकार, पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद

खाद्य तेल के पैक आकारों के मानकीकरण की तैयारी में सरकार, पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद
Modified Date: June 4, 2026 / 12:21 pm IST
Published Date: June 4, 2026 12:21 pm IST

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) सरकार खाद्य तेल के पैक आकार का मानकीकरण करने के लिए नए नियम लाने की तैयारी कर रही है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और विनिर्माताओं के बीच समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा।

प्रस्तावित कदम का उद्देश्य 850 मिलीलीटर, 875 मिलीलीटर, 900 मिलीलीटर और 950 मिलीलीटर जैसे गैर-मानक पैक आकारों की बढ़ती प्रवृत्ति से निपटना है।

उद्योग के अनुसार, ऐसे पैक आकारों के कारण उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग ब्रांड की कीमतों की तुलना करना और प्रति लीटर वास्तविक लागत समझना मुश्किल हो जाता है।

यह पहल उपभोक्ता संरक्षण, पारदर्शी लेबलिंग और टिकाऊ पैकेजिंग प्रथाओं पर बढ़ते नियामकीय ध्यान के बीच की जा रही है।

पुरी ऑयल मिल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (एमडी) विवेक पुरी ने कहा कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान दिया है और गैर-मानकीकृत पैक आकारों की समस्या को दूर करने की दिशा में कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘ कई वर्षों से हम यह कहते आए हैं कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट, पारदर्शी एवं तुलनीय मूल्य मिलना चाहिए। मानकीकृत पैक आकार उपभोक्ताओं को सही निर्णय लेने में मदद करेंगे और प्रतिस्पर्धा को गुणवत्ता, शुद्धता एवं मूल्य के आधार पर सुनिश्चित करेंगे, न कि पैकेजिंग के तरीकों पर।’’

उद्योग के अनुसार, पैक आकारों के मानकीकरण से उत्पादों की तुलना करना आसान होगा और पैक्ड खाद्य तेलों में उपभोक्ता विश्वास मजबूत होगा।

हितधारकों ने इसके संभावित पर्यावरणीय लाभों की ओर भी संकेत किया है। अलग-अलग पैक आकारों के कारण अलग-अलग बोतल ढांचे, लेबल और पैकेजिंग की जरूरत होती है, जिससे आपूर्ति शृंखला जटिल होती है और सामग्री की खपत बढ़ती है। मानकीकरण से उत्पादन प्रक्रिया सरल हो सकती है और अनावश्यक प्लास्टिक उपयोग कम हो सकता है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य तेल जैसे बड़े उपभोक्ता वर्ग में पैक आकारों का मानकीकरण पारदर्शिता बढ़ाने, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है।

सरकार ने हालांकि अभी तक इन प्रस्तावित बदलावों की औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की है।

विवेक पुरी ने कहा,‘‘ जब कोई उपभोक्ता दुकान पर दो पैक की तुलना करता है, तो यह प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। दुर्भाग्य से गैर-मानक पैक आकार इसे कठिन बना देते हैं। मानकीकरण से पारदर्शिता बढ़ेगी, उपभोक्ता विश्वास मजबूत होगा और सभी विनिर्माताओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।’’

भाषा निहारिका

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