Raisen Water Crisis : सूखे नलों ने रोकी शहनाइयाँ! कागज़ पर चल रही ‘नल-जल योजना’, ज़मीन पर पानी की कमी के कारण इस गांव में कुँवारे घूम रहे युवा

रायसेन जिले में प्रधानमंत्री नल-जल योजना की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। कई गांवों में पाइपलाइन और टंकी लगाने के बावजूद पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधूरे काम और खराब मोटरों के कारण वे आज भी दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी में पेयजल संकट ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

Raisen Water Crisis : सूखे नलों ने रोकी शहनाइयाँ! कागज़ पर चल रही ‘नल-जल योजना’, ज़मीन पर पानी की कमी के कारण इस गांव में कुँवारे घूम रहे युवा

Raisen Water Crisis / Image Source : IBC24

Modified Date: June 4, 2026 / 11:09 am IST
Published Date: June 4, 2026 10:58 am IST
HIGHLIGHTS
  • कई गांवों में नल-जल योजना के बावजूद पानी की सप्लाई नहीं
  • खराब मोटर और अधूरे निर्माण के कारण ग्रामीण परेशान
  • महिलाओं को रोजाना दूर से पानी लाने की मजबूरी

रायसेन : Raisen Water Crisis :  मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में प्रधानमंत्री नल-जल योजना महज दिखावा बनकर रह गई है। हर पंचायत में नल-जल योजना की टंकी और पाइपलाइन तो डाल दी गई, लेकिन इस योजना से घर-घर पानी नहीं पहुंच रहा है। वजह कहीं ठेकेदार अधूरा काम छोड़ गया तो कहीं घटिया निर्माण की वजह से पानी नहीं पहुंच रहा और ग्रामीण आज भी कोसों दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। पीएचई विभाग अपने आपको असहाय महसूस कर रहा है। पूरे जिले में ऐसे कई गांव हैं जहां आज भी पानी लोगों के लिए दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।

पानी की वजह से कुंवारे बैठे युवक

हम बात कर रहे हैं रायसेन जिले के अंतिम छोर पर बसे बेगमगंज जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मरखेड़ा गुलाब के गांव जमुनिया, टेकापार कला की, जहां आज भी युवा महज पानी की वजह से कुँवारे बैठे हुए हैं।MP Water Scarcity News  मां-बाप अपनी बेटी की शादी इस गांव में सिर्फ इसलिए नहीं करते कि यहां पानी की कमी है। ऐसे में 20 से 40 साल के कई युवा आज भी कुँवारे हैं। सवाल यही है कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना को आखिर पलीता कौन लगा रहा है।

गांव में लगे बोरवेल की मोटर ख़राब

रायसेन जिले की सिलवानी विधानसभा अंतर्गत बेगमगंज जनपद की ग्राम पंचायत मरखेड़ा गुलाब के गांव जमुनिया, टेकापार कला और बेरखेड़ी में प्रधानमंत्री हर घर नल-जल योजना की जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगे बोरवेल की मोटर करीब एक साल से खराब होकर बोर में फंसी हुई है, लेकिन उसे निकालने और सुधारने की दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। Silwani Assembly Drinking Water भीषण गर्मी में लोग मोटरसाइकिल, साइकिल और बैलगाड़ी के जरिए खेतों और कुओं से पानी लाने को मजबूर हैं। महिलाओं और पुरुषों का अधिकांश समय सिर्फ पानी जुटाने में ही गुजर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में हर घर जल पहुंच रहा है, लेकिन हकीकत में उन्हें एक-एक बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

दूषित पानी पी रहे ग्रामीण

सिलवानी विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। ग्रामीण खेतों में बने कुओं और अन्य जलस्रोतों से मटमैला और दूषित पानी भरकर घर ला रहे हैं। उनका कहना है कि गंदा पानी पीने से लोगों की तबीयत खराब हो रही है और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की मांग

गांव की महिलाएं सुबह से लेकर देर रात तक पानी भरने की जद्दोजहद में लगी रहती हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी रिपोर्टों में योजना को सफल बता रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल खराब मोटर को बदलकर नियमित पेयजल उपलब्ध कराने और इस संकट से छुटकारा दिलाने की मांग की है।

इन्हें भी पढ़ें :

 


लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and storyteller committed to ethical, ground-level, and impact-oriented reporting. A Gold Medalist in Journalism And Mass Communication, I believe in telling stories with accuracy, sensitivity, and purpose. Currently working with IBC24, I specialize in content writing, news production, and modern storytelling bridging facts with human experiences to inform, engage, and inspire audiences..