सरकार ने नए सीएएफई मानदंडों का मसौदा किया जारी, हितधारकों से सुझाव मांगे

सरकार ने नए सीएएफई मानदंडों का मसौदा किया जारी, हितधारकों से सुझाव मांगे

सरकार ने नए सीएएफई मानदंडों का मसौदा किया जारी, हितधारकों से सुझाव मांगे
Modified Date: July 16, 2026 / 01:55 pm IST
Published Date: July 16, 2026 1:55 pm IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) बिजली मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता-2027 (सीएएफई) मानदंड का मसौदा जारी कर हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए।

वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में चरणबद्ध तरीके से कमी लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए ये नए मानदंड मौजूदा सीएएफई (द्वितीय) मानदंड का स्थान लेंगे, जिनकी अवधि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने की संभावना है।

मंत्रालय ने बयान में कहा कि प्रस्तावित मानदंड भारत में बिक्री के लिए वित्त वर्ष 2027-28 से 2031-32 के दौरान विनिर्मित या आयातित एम-1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू होंगे।

एम-1 श्रेणी में चालक के अलावा अधिकतम आठ सीट वाले यात्री वाहन शामिल होते हैं।

मंत्रालय ने कहा कि हितधारक तथा आम लोग अपने सुझाव एवं टिप्पणियां ई-मेल के माध्यम से अथवा अवर सचिव (ऊर्जा संरक्षण) को भेज सकते हैं। सुझाव और टिप्पणियां भेजने की अंतिम तिथि छह अगस्त 2026 है।

मंत्रालय के अनुसार, मसौदा मानदंड शीघ्र ही बिजली मंत्रालय और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

एक अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित सीएएफई (तृतीय) मानदंडों के अनुपालन का आकलन पहले तीन वर्ष के एक प्रारंभिक चरण और उसके बाद दो वर्ष के दूसरे चरण में किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि ईंधन खपत के लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से और कड़े किए जाएंगे। इन्हें वर्ष 2027-28 में 3.996 लीटर प्रति 100 किलोमीटर (94.76 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किलोमीटर) से घटाकर वर्ष 2031-32 तक 3.3273 लीटर प्रति 100 किलोमीटर (78.90 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किलोमीटर) करने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि लक्ष्यों को चरणबद्ध तरीके से कड़ा किए जाने से मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) को स्पष्ट और विश्वसनीय नियामकीय ढांचा मिलेगा, जिससे वे अधिक ईंधन दक्ष वाहन मॉडल विकसित और पेश कर सकेंगे।

अधिकारी ने कहा कि सीएएफई (तृतीय) मानदंड लागू होने के बाद पहली बार एथनॉल, जैव ईंधन और संपीड़ित जैव गैस (सीबीजी) की कार्बन तटस्थता को मान्यता दी जाएगी। इसके तहत अनुपालन का आकलन करने से पहले घोषित टेलपाइप कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में निर्धारित कटौती की अनुमति होगी।

उन्होंने कहा कि मौजूदा एथनॉल मिश्रण स्तर के लिए आठ प्रतिशत कार्बन तटस्थता कारक (सीएनएफ) माना जाएगा जबकि सीबीजी और जैव ईंधन के लिए कटौती प्रचलित वास्तविक मिश्रण स्तर के आधार पर तय होगी।

अधिकारी ने बताया कि स्वीकृत ईंधन बचत प्रौद्योगिकियों के लिए वाहन निर्माता अनुपालन लाभ के रूप में अधिकतम नौ ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किलोमीटर तक का दावा कर सकेंगे। हालांकि, प्रत्येक प्रौद्योगिकी के लिए यह लाभ अधिकतम एक ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड प्रति किलोमीटर तक सीमित रहेगा।

भाषा निहारिका

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