रक्षा क्षेत्र में एफडीआई नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है सरकार

रक्षा क्षेत्र में एफडीआई नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है सरकार

रक्षा क्षेत्र में एफडीआई नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है सरकार
Modified Date: August 31, 2026 / 03:55 pm IST
Published Date: August 31, 2026 3:55 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) सरकार विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में और ढील देने पर विचार कर रही है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘रक्षा क्षेत्र में एफडीआई से संबंधित नियमों में कुछ ढील देने पर विचार किया जा रहा है।’’

फिलहाल रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत तक एफडीआई की स्वत: मंजूरी मार्ग से और इससे अधिक विदेशी निवेश की सरकारी मंजूरी मार्ग से अनुमति है। हालांकि, आधुनिक प्रौद्योगिकी तक पहुंच मिलने की संभावना वाले मामलों में ही 74 प्रतिशत से अधिक एफडीआई की अनुमति दी जाती है।

इस नीति के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी और रक्षा मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अधीन है।

भारत में अप्रैल, 2000 से मार्च, 2026 के बीच रक्षा उद्योगों में 3.23 करोड़ डॉलर का एफडीआई आया है।

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। देश का रक्षा बजट 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो चुका है।

रक्षा क्षेत्र से निर्यात 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये हो गया। इसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 17,353 करोड़ रुपये यानी 45.16 प्रतिशत और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी 21,071 करोड़ रुपये यानी 54.84 प्रतिशत रही।

सरकार ने वर्ष 2029 तक सालाना तीन लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

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