सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क 10-10 रुपये घटाया

सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क 10-10 रुपये घटाया

सरकार ने पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क 10-10 रुपये घटाया
Modified Date: March 27, 2026 / 03:34 pm IST
Published Date: March 27, 2026 3:34 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस कदम से पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ी कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत दी गयी है, जिससे सरकारी खजाने पर सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये का राजस्व बोझ पड़ने का अनुमान है।

इसके साथ ही सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर शुल्क लगा दिया है।

बृहस्पतिवार देर रात जारी एक अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है।

साथ ही, सरकार ने डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रिफाइनरी कंपनियों के अप्रत्याशित लाभ (विंडफॉल टैक्स) पर लगाम लगाने के लिए जुलाई 2022 में पहली बार यह कर लगाया गया था।

‘अप्रत्याशित मुनाफा’ उस अतिरिक्त लाभ को कहते हैं जो कंपनियों को बिना किसी निवेश या प्रयास के केवल वैश्विक परिस्थितियों के कारण अचानक मिलता है। इस कर को दिसंबर 2024 में हटा लिया गया था, जिसे अब दोबारा लागू किया गया है।

हालांकि, पिछली बार के विपरीत ओएनजीसी जैसी घरेलू कच्चा तेल उत्पादक कंपनियों पर कोई अप्रत्याशित लाभ कर नहीं लगाया गया है।

उत्पाद शुल्क में इस कटौती के बाद पेट्रोल पर प्रभावी उत्पाद शुल्क 11.9 रुपये प्रति लीटर होगा (जिसमें 1.40 रुपये मूल उत्पाद शुल्क, 3 रुपये विशेष अतिरिक्त शुल्क, 2.50 रुपये कृषि उपकर और 5 रुपये सड़क बुनियादी ढांचा उपकर शामिल है)।

वहीं, डीजल पर प्रभावी शुल्क 7.80 रुपये प्रति लीटर (1.80 रुपये मूल शुल्क, 4 रुपये कृषि उपकर और 2 रुपये सड़क उपकर) रह जाएगा।

सालाना 175 अरब लीटर ईंधन की बिक्री (115 अरब लीटर डीजल और 60 अरब लीटर पेट्रोल) को देखते हुए, इस शुल्क कटौती का राजकोषीय प्रभाव सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये होगा।

यह कटौती अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल के कारण तेल कंपनियों को हो रहे रिकॉर्ड नुकसान के बाद की गई है। ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के कारण वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें इस महीने लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।

तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के बावजूद पेट्रोल पंपों पर दरों को स्थिर रखा गया था, जिससे तेल कंपनियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित होने लगी थी।

इस दबाव को कम करने के लिए सरकार ने उत्पाद शुल्क घटाया है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पेट्रोल में 24 रुपये और डीजल में 30 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की जरूरत थी, जिसकी भरपाई इस कटौती से की जाएगी।

ईरान युद्ध तेज होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें इस महीने की शुरुआत में 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो अब 100 डॉलर के आसपास हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 प्रतिशत आयात करता है, जिसकी अधिकांश आपूर्ति ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते होती है, जो वर्तमान में बाधित है।

तनाव का पहला संकेत तब मिला जब देश के सबसे बड़े निजी ईंधन विक्रेता ‘नायरा एनर्जी’ ने बृहस्पतिवार को पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर दी। नायरा के पंप पर अब पेट्रोल 100.71 रुपये और डीजल 91.31 रुपये लीटर है।

बाजार के 90 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अभी कीमतों को स्थिर रखा है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि उत्पाद शुल्क में कटौती ‘उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा प्रदान करेगी।’

उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की लागत और आपूर्ति की अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क लगाने से घरेलू खपत के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।

उन्होंने कहा, ‘इसके परिणामस्वरूप, दुनिया भर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30 से 50 प्रतिशत, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30 प्रतिशत, यूरोप में 20 प्रतिशत और अफ्रीकी देशों में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।’

मंत्री ने कहा कि सरकार के पास दो ही विकल्प थे – या तो कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जाए या फिर अपने वित्त पर इस बोझ को खुद सहा जाए।

पुरी ने कहा, ‘सरकार ने राजस्व पर पड़ने वाले बोझ स्वयं उठाने का निर्णय किया है ताकि इस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आसमान छूती कीमतों के बीच तेल कंपनियों के भारी नुकसान को कम किया जा सके।’’

वैश्विक स्थिति को अस्थिर बताते हुए पुरी ने कहा कि सरकार ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की वास्तविक समय के आधार पर निगरानी कर रही है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत में ‘लॉकडाउन’ की अफवाहें पूरी तरह से गलत हैं।

उन्होंने कहा, ‘सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे समय में शांत और एकजुट रहना महत्वपूर्ण है। अफवाह फैलाना गैर-जिम्मेदाराना और नुकसानदायक है।’

भाषा सुमित रमण

रमण


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