Allahabad High Court Live-in Verdict : शादीशुदा होकर भी लिव-इन में रहना अब गुनाह नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला कहा -बालिगों को…

Allahabad High Court Live-in Verdict : शादीशुदा होकर भी लिव-इन में रहना अब गुनाह नहीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला कहा -बालिगों को…

Allahabad High Court Live-in Verdict / Image Source : FILE

Modified Date: March 27, 2026 / 04:56 pm IST
Published Date: March 27, 2026 4:38 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने बालिगों के लिव-इन रिलेशनशिप को अपराध नहीं माना।
  • पुलिस को जोड़े की सुरक्षा देने का आदेश, परिवार को संपर्क न करने की चेतावनी।
  • अदालत ने कानून और नैतिकता अलग बताते हुए निजी आजादी को सुरक्षित रखा।

प्रयागराज: Allahabad High Court Live-in Verdict  लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी मर्जी से रहता है, तो इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने नैतिकता बनाम कानून की बहस पर रोक लगाते हुए कहा कि सामाजिक सोच के आधार पर किसी की निजी आजादी में दखल नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने अगले आदेश तक याचिकाकर्ता जोड़े की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए पुलिस को उन्हें सुरक्षा देने का आदेश दिया है।

Shahjahanpur News परिवार को ‘नो एंट्री’ की चेतावनी

दरअसल , पूरा मामला शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने का है, जहाँ एक मां ने अपनी बेटी के अपहरण की FIR दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ता अनामिका और नेत्रपाल ने कोर्ट को बताया कि वे बालिग हैं और मर्जी से साथ रह रहे हैं। कोर्ट ने न केवल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई, बल्कि शाहजहांपुर के पुलिस कप्तान को व्यक्तिगत रूप से उनकी सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि यदि जोड़े को कुछ भी होता है, तो पुलिस जवाबदेह होगी। अदालत ने लड़की के परिजनों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। आदेश के मुताबिक, परिवार का कोई भी सदस्य इस जोड़े से संपर्क नहीं करेगा, न ही उनके घर में घुसेगा। कोर्ट ने ऑनर किलिंग के खतरे को देखते हुए साफ किया कि पुलिस को सुरक्षा मुहैया करानी ही होगी।

High court judgement on live-in- relationship कानून और नैतिकता अलग-अलग

विपक्षी वकील ने दलील दी कि नेत्रपाल पहले से शादीशुदा है, इसलिए यह रिश्ता अवैध है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि कानून और नैतिकता दो अलग चीजें हैं। जब तक कोई कानून नहीं टूटता, तब तक बालिगों को अपनी मर्जी से साथ रहने का पूरा हक है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा सुरक्षा में ढिलाई बरतने पर भी नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को आदेश दिया है कि अगले 24 घंटों के भीतर यह फैसला शाहजहांपुर पुलिस प्रशासन तक पहुँचाया जाए। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होनी तय हुई है।

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