सरकार ने रिफाइनरियों पर लगाया एस्मा, एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का दिया निर्देश

सरकार ने रिफाइनरियों पर लगाया एस्मा, एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का दिया निर्देश

सरकार ने रिफाइनरियों पर लगाया एस्मा, एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का दिया निर्देश
Modified Date: March 6, 2026 / 06:22 pm IST
Published Date: March 6, 2026 6:22 pm IST

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) सरकार ने तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देने के लिए ‘एस्मा’ कानून के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। इसका मकसद पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाना है।

भारत की एलपीजी खपत वित्त वर्ष 2024-25 में 3.13 करोड़ टन थी, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया गया था, जबकि बाकी का आयात किया गया था।

भारत का 85-90 प्रतिशत आयात सऊदी अरब जैसे देशों से आता है जो आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच एक सप्ताह से जारी संघर्ष के कारण यह समुद्री मार्ग बंद हो गया है।

भारत में तेलशोधन क्षमता पर्याप्त होने के बावजूद तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार ने रिफाइनरियों को इसका उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पांच मार्च को जारी एक आदेश में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की सभी रिफाइनरियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उत्पादन के दौरान निकलने वाली प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का अधिकतम उपयोग एलपीजी के उत्पादन में किया जाए।

एलपीजी असल में प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होता है और देश में इसका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू रसोई गैस के रूप में किया जाता है।

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (एस्मा) के तहत जारी इस आदेश में तेल रिफाइनरियों से कहा गया है कि वे उत्पादित एलपीजी को केवल तीन सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों- इंडियन ऑयल (आईओसी), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) को ही उपलब्ध कराएं।

इसके साथ ही सरकार ने रिफाइनरियों को प्रोपेन एवं ब्यूटेन का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने में करने से रोक दिया है।

मंत्रालय ने कहा है कि सभी तेल रिफाइनिंग कंपनियां प्रोपेन या ब्यूटेन का इस्तेमाल न तो पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण के लिए करेंगी और न ही उनका उपयोग, प्रसंस्करण, क्रैकिंग या रूपांतरण करेंगी।

आदेश में कहा गया है कि इन गैसों से बनने वाली एलपीजी केवल घरेलू उपभोक्ताओं को खाना पकाने के उपयोग के लिए बेची जाएगी।

इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

भारत में इस समय 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं और सरकार की कोशिश रसोई गैस की आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने की है।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम


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