नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने रविवार को कहा कि सरकार वाहन विनिर्माताओं के लिए ‘कैफे-3’ नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों के साथ आम सहमति बनाएगी। ये नियम किसी वाहन निर्माता के सभी मॉडल में औसत ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन को सीमित करने के लिए तैयार किए गए हैं।
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा प्रस्तावित ‘कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी-3’ (कैफे-3) नियमों को एक अप्रैल, 2027 से 31 मार्च, 2032 तक प्रभावी बनाने का प्रस्ताव है। सरकार ने इस मसौदे पर संबंधित पक्षों से राय मांगी है।
इन नियमों को लागू करने के ढांचे पर वाहन विनिर्माताओं के विचार बंटे हुए हैं। कुछ कंपनियां वजन और कम कीमत के आधार पर छोटी कारों के लिए उत्सर्जन मानकों में ढील की मांग कर रही हैं। वहीं, इस ढील का विरोध करने वालों का तर्क है कि इससे सुरक्षा मानकों से समझौता होगा और देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान में बाधा आएगी।
सितंबर, 2025 में चर्चा के लिए लाए गए नियमों के मसौदे में उन छोटी कारों के लिए मानकों में ढील देने का सुझाव दिया गया था, जिनका कुल वजन 909 किलोग्राम तक, इंजन क्षमता 1200 सीसी से कम और लंबाई 4000 मिलीमीटर (चार मीटर) से अधिक नहीं है।
बीईई के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर बिजली मंत्री ने कहा, ‘‘विभिन्न प्रकार के उपभोक्ता हैं और सरकार को उनसे परामर्श करना होगा। उनकी प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं और विचारों में टकराव भी है। हम आम सहमति बनाने की कोशिश करते हैं। चूंकि सबके अपने हित जुड़े हैं, इसलिए हर फैसला सर्वसम्मति से नहीं हो पाता। हम एक सर्वमान्य दृष्टिकोण अपनाएंगे और इसे जल्द लागू करेंगे।’’
पिछले सप्ताह केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने बताया था कि इस संबंध में संबंधित पक्षों और ऊर्जा मंत्रालय के साथ बैठक हो चुकी है और प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेज दिया गया है।
कैफे मानकों की शुरुआत 2017 में हुई थी। इसके दूसरे चरण (कैफे-2) की शुरुआत 2022 में हुई और अगला चरण (कैफे-3) अप्रैल, 2027 से शुरू होने की संभावना है।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शैलेश चंद्रा ने नवंबर में कहा था कि छोटी कारों को कोई ढील नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि इससे सुरक्षा फीचर प्रभावित होंगे।
वहीं, मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आर सी भार्गव ने छोटी कारों के लिए रियायत का प्रस्ताव देते हुए तर्क दिया था कि कैफे मानकों का मुख्य उद्देश्य बड़ी कारों की ईंधन दक्षता में सुधार करना और उत्सर्जन कम करना है।
भाषा अजय सुमित
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