अप्रैल में रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह, 8.7 प्रतिशत बढ़कर 2.43 लाख करोड़ रुपये पर

अप्रैल में रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह, 8.7 प्रतिशत बढ़कर 2.43 लाख करोड़ रुपये पर

अप्रैल में रिकॉर्ड जीएसटी संग्रह, 8.7 प्रतिशत बढ़कर 2.43 लाख करोड़ रुपये पर
Modified Date: May 1, 2026 / 04:34 pm IST
Published Date: May 1, 2026 4:34 pm IST

नयी दिल्ली, एक मई (भाषा) सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अप्रैल महीने में 8.7 प्रतिशत बढ़कर करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सरकार के आंकड़ों से शुक्रवार को यह जानकारी मिली।

इन आंकड़ों से पता चला है कि आयात से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि ने घरेलू लेनदेन से प्राप्त संग्रह को पीछे छोड़ दिया।

इससे पहले जीएसटी का सर्वकालिक उच्च संग्रह अप्रैल, 2025 में 2.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा था।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में घरेलू लेनदेन से सकल राजस्व 4.3 प्रतिशत बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जबकि आयात से जीएसटी संग्रह 25.8 प्रतिशत की तेज वृद्धि के साथ 57,580 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

अप्रैल में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) संग्रह 52,140 करोड़ रुपये और राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) संग्रह 61,331 करोड़ रुपये रहा। एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) से राजस्व संग्रह 1.29 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

इस अवधि में रिफंड 19.3 प्रतिशत बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये हो गया। रिफंड समायोजन के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 7.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा।

प्राइस वाटरहाउस एंड कंपनी एलएलपी में साझेदार प्रतीक जैन ने कहा कि जीएसटी में व्यापक सुधार लागू होने के बाद मासिक कर संग्रह में सात-आठ प्रतिशत की स्थिर वृद्धि अब एक सामान्य रुझान बनती दिख रही है, जो बजट अनुमानों के अनुरूप है।

हालांकि, जैन ने कहा कि आयात आधारित राजस्व की तेज वृद्धि से उपभोग में कुछ नरमी का संकेत मिल सकता है।

डेलॉयट इंडिया में साझेदार महेश जयसिंह ने कहा कि आयात से जुड़े जीएसटी में करीब 26 प्रतिशत की वृद्धि अस्थिर वैश्विक माहौल के बावजूद व्यापार प्रवाह में मजबूती को दर्शाती है। साथ ही घरेलू जीएसटी का स्थिर प्रदर्शन बताता है कि दरों के सरलीकरण से मांग को समर्थन मिल रहा है।

ईवाई इंडिया में कर साझेदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि कुल कर संग्रह के आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन घरेलू लेनदेन और आयात आधारित राजस्व के बीच अंतर होना नीतिगत पुनर्मूल्यांकन की जरूरत दर्शाता है। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक आपूर्ति शृंखला बदलावों के अनुरूप मजबूत करने पर जोर दिया।

सितंबर 2025 से लागू हुए व्यापक जीएसटी सुधारों के तहत करीब 375 वस्तुओं पर कर दरें घटाई गईं और चार स्लैब को मिलाकर पांच एवं 18 प्रतिशत के दो कर स्लैब कर दिए गए। हालांकि कुछ विलासिता वाले एवं तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत की उच्च दर बरकरार रखी गई है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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