अगर हाल का संकट नहीं आता तो भारत बन चुका होता तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था: राजनाथ

अगर हाल का संकट नहीं आता तो भारत बन चुका होता तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था: राजनाथ

अगर हाल का संकट नहीं आता तो भारत बन चुका होता तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था: राजनाथ
Modified Date: August 26, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: August 26, 2026 10:09 pm IST

पणजी, 26 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और अगर हालिया वैश्विक संकट नहीं आया होता तो देश आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया होता।

इसके साथ ही सिंह ने भरोसा जताया कि भारत निश्चित रूप से यह उपलब्धि हासिल करेगा।

रक्षा मंत्री ने गोवा के नॉर्थ गोवा जिले में शहीद स्मारक का उद्घाटन करने के बाद एक सभा में कहा कि संकट नहीं आया होता तो भारत अगले छह महीने से एक साल में दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता था।

सिंह का इशारा स्पष्ट रूप से अमेरिका-ईरान युद्ध की ओर था। फरवरी अंत में शुरू हुआ यह संघर्ष अभी तक जारी है।

उन्होंने कहा कि भारत लड़ाकू विमान, युद्धपोत, मिसाइल, रडार, ड्रोन और उन्नत रक्षा प्रणालियों समेत रक्षा उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमता मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन चीजों का भारत पहले दूसरे देशों से आयात करता था, अब उनका निर्माण देश में भारतीयों द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि 2014 में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार बनने के बाद भारत का रक्षा निर्यात पहले के करीब 600 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 50,000 करोड़ रुपये हो गया है। रक्षा उत्पादन भी पहले के कुछ हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

सिंह ने कहा कि भारत अब केवल हथियारों का आयातक नहीं है, बल्कि वैश्विक रक्षा विनिर्माण में एक महत्वपूर्ण निर्यातक भी बन रहा है।

उन्होंने रक्षा और विकास क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय महिलाएं अब लड़ाकू विमान के कॉकपिट में बैठने के साथ देश के अंतरिक्ष अभियानों का हिस्सा बन रही हैं और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले स्टार्टअप शुरू कर रही हैं।

उन्होंने युवाओं से नागरिक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को समझने तथा देश की एकता मजबूत करने, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने, कानून का पालन करने और निजी हितों से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखने का आह्वान किया।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय


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