रतन टाटा ट्रस्ट की बैठक पर रोक की याचिका पर तत्काल सुनवाई से उच्च न्यायालय का इनकार

रतन टाटा ट्रस्ट की बैठक पर रोक की याचिका पर तत्काल सुनवाई से उच्च न्यायालय का इनकार

रतन टाटा ट्रस्ट की बैठक पर रोक की याचिका पर तत्काल सुनवाई से उच्च न्यायालय का इनकार
Modified Date: May 7, 2026 / 08:23 pm IST
Published Date: May 7, 2026 8:23 pm IST

मुंबई, सात मई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने सर रतन टाटा ट्रस्ट की आठ मई को प्रस्तावित बोर्ड बैठक पर रोक लगाने का अनुरोध वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ के समक्ष इस याचिका का उल्लेख किया गया था। इसमें ट्रस्ट की शुक्रवार को होने वाली बोर्ड बैठक पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध किया गया था।

हालांकि न्यायालय ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को अवकाशकालीन पीठ के समक्ष याचिका दायर करने की छूट दी। उच्च न्यायालय शनिवार से ग्रीष्मकालीन अवकाश के लिए बंद हो रहा है।

यह याचिका ठाणे निवासी 61 वर्षीय सुरेश पाटिलखेड़े ने दायर की है। इसमें ट्रस्ट के ट्रस्टी को प्रस्तावित बैठक में किसी भी निर्णय को पारित या लागू करने से रोकने की भी मांग की गई थी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह प्रतिष्ठित सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियम में 2025 में किए गए संशोधन का उल्लंघन कर रहा है, जिसमें ‘आजीवन ट्रस्टी’ की संख्या पर सीमा तय की गई है।

संशोधन के अनुसार, यदि ट्रस्ट के मूल दस्तावेज स्थायी या आजीवन ट्रस्टी की अनुमति नहीं देते हैं, तो ऐसे ट्रस्टी की संख्या कुल सदस्यों के एक-चौथाई से अधिक नहीं हो सकती।

याचिका के मुताबिक, इस ट्रस्ट में कुल छह ट्रस्टी हैं, जिनमें जिम्मी नवल टाटा, जहांगीर एच सी जहांगीर, नोएल नवल टाटा, वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह और डेरियस खम्बाटा शामिल हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, इनमें से तीन ट्रस्टी ‘आजीवन ट्रस्टी’ के रूप में कार्यरत हैं, जो कानून में निर्धारित सीमा के विपरीत है।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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