वायदा एवं विकल्प कारोबार में अधिक कर का मकसद इस पर अंकुश लगाना: नीति सदस्य विरमानी

वायदा एवं विकल्प कारोबार में अधिक कर का मकसद इस पर अंकुश लगाना: नीति सदस्य विरमानी

वायदा एवं विकल्प कारोबार में अधिक कर का मकसद इस पर अंकुश लगाना: नीति सदस्य विरमानी
Modified Date: February 5, 2026 / 06:25 pm IST
Published Date: February 5, 2026 6:25 pm IST

नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने कहा है कि वायदा और विकल्प कारोबार पर कर बढ़ाने का मकसद अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले कारोबार पर अंकुश लगाना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के केंद्रीय बजट में वायदा और विकल्प (एफ एंड ओ) कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद छोटे निवेशकों को सट्टेबाजी के कारण होने वाले भारी नुकसान से बचाना है।

एसटीटी को वायदा अनुबंधों के लिए 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और विकल्प प्रीमियम और विकल्पों के प्रयोग पर क्रमशः 0.1 प्रतिशत और 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

विरमानी ने पीटीआई वीडियो को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘कारोबार को हतोत्साहित करना ऐसी चीज है जो मेरे जैसे बाजार के जानकार को पसंद नहीं है। लेकिन जिसे हम बाधित करना कहते हैं, वह ऐसा करने का एक बेहतर तरीका है।’’

वित्त वर्ष 2024-25 में शेयर वायदा एवं विकल्प खंड में कारोबार करने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की संख्या 1.06 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 (30 दिसंबर, 2025 तक) में घटकर लगभग 75.43 लाख रह गई।

बाजार नियामक सेबी के एक अध्ययन के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में व्यक्तिगत निवेशकों को 1,05,603 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ।

वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) खंड में 90 प्रतिशत खुदरा निवेशकों को कारोबार में घाटा उठाना पड़ा है और पूंजी बाजार नियामक ने अतीत में मात्रा कम करने के लिए कदम भी उठाए हैं।

भाषा रमण अजय

अजय


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