दो खाद्य तेल किस्मों पर आयात शुल्क कटौती से कैसे बढ़ेंगी आपूर्ति, सरकार का उद्योग से सवाल
दो खाद्य तेल किस्मों पर आयात शुल्क कटौती से कैसे बढ़ेंगी आपूर्ति, सरकार का उद्योग से सवाल
नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) चावल भूसी तेल और जैतून के पोमेस तेल पर आयात शुल्क कम करने की मांग के बीच सरकार ने खाद्य तेल संघों से कहा है कि वे समझाएं कि इस कदम से घरेलू उपलब्धता बढ़ाने में कैसे मदद मिलेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए), इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) और सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसओपीए) को इस संबंध में पत्र लिखा है।
पत्र में कहा गया है, ‘‘…उद्योग इस बारे में लिखित जवाब दे सकता है कि चावल की भूसी के तेल और जैतून के पोमेस तेल के शुल्क ढांचे में कमी करने से देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने में कैसे मदद मिलेगी।’’
देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता और कीमतों की स्थिति पर छह जुलाई को हुई बैठक के बाद यह पत्र आया है। उस बैठक में सरकार ने उद्योग संघों को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को 15 रुपये प्रति लीटर तक कम करने और उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट का लाभ मुहैया करने का निर्देश दिया था।
आयातित खाद्य तेलों के एमआरपी को कम करने का वादा करने के अलावा उद्योग संघों ने उस बैठक में सरकार से खाद्य तेलों की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी के तेल के अनुरूप चावल भूसी तेल और जैतून के पोमेस तेल पर आयात शुल्क कम करने का आग्रह किया था।
एसईए के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘देश में चावल भूसी तेल और जैतून के पोमेस तेल की मांग है। शुल्क में कमी से इन दो खाद्य तेलों के कम से कम 15,000 से 20,000 टन के आयात में मदद मिलेगी।’’
सरकार ने 24 मई को खाद्य तेलों की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को नरम करने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के तहत 20 लाख टन कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी।
टीआरक्यू आयात की मात्रा के लिए एक कोटा है जो निर्दिष्ट या शून्य शुल्क पर भारत में प्रवेश की अनुमति देता है। कोटा भरने के बाद अतिरिक्त आयात पर सामान्य शुल्क दर लागू होती है।
सूत्रों ने बताया कि संघों से कहा गया है कि वे खाद्य तेल कंपनियों से एमआरपी कम करने को कहें।
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरत का 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय
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