श्रीलंका में चक्रवात दितवाह के बाद हुए आर्थिक नुकसान का आकलन करेगा आईएमएफ

श्रीलंका में चक्रवात दितवाह के बाद हुए आर्थिक नुकसान का आकलन करेगा आईएमएफ

श्रीलंका में चक्रवात दितवाह के बाद हुए आर्थिक नुकसान का आकलन करेगा आईएमएफ
Modified Date: January 16, 2026 / 11:48 am IST
Published Date: January 16, 2026 11:48 am IST

कोलंबो, 16 जनवरी (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का आकलन दल चक्रवात ‘दितवाह’ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए 22 से 28 जनवरी तक श्रीलंका की यात्रा करेगा।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का दल इस बात का पता लगाएगा कि वह श्रीलंका को उसके पुनर्निर्माण प्रयासों में सर्वोत्तम सहायता कैसे प्रदान कर सकती है। इसमें विस्तारित निधि सुविधा द्वारा समर्थित कार्यक्रम को फिर से शुरू करना और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत सलाह एवं तकनीकी सहायता प्रदान करना शामिल है।

श्रीलंका में आईएमएफ मिशन के प्रमुख इवान पापाजॉर्जियो ने बयान में कहा, ‘‘ चक्रवात दितवाह से हुए नुकसान के पैमाने एवं दायरे पर अधिकारियों के साथ चर्चा करने के लिए आईएमएफ का एक दल 22 से 28 जनवर 2026 तक श्रीलंका की यात्रा करेगा। मिशन के निष्कर्षों को आईएमएफ समर्थित कार्यक्रम पर आगे की चर्चाओं में शामिल किया जाएगा।’’

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इस यात्रा के दौरान आईएमएफ का दल सरकारी अधिकारियों और संबंधित हितधारकों से बातचीत करेगी ताकि बुनियादी ढांचे, आजीविका एवं आर्थिक स्थिरता पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव को समझा जा सके।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब आईएमएफ ने श्रीलंका को आर्थिक सुधार में मदद के लिए 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा की है।

आईएमएफ ने 2.9 अरब अमेरिकी डॉलर के राहत पैकेज की पांचवीं समीक्षा को अगले महीने तक के लिए टाल दिया है। छठी किस्त के तहत लगभग 33 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि प्राप्त होगी।

विश्व बैंक समूह द्वारा दिसंबर में जारी ‘ग्लोबल रैपिड पोस्ट-डिजास्टर डैमेज एस्टिमेशन’ (जीआरडीई) रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर के अंत में श्रीलंका में आए चक्रवात दितवाह ने इमारतों और उनमें मौजूद सामान, कृषि एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को लगभग 4.1 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष भौतिक नुकसान पहुंचाया है।

यह नुकसान श्रीलंका के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग चार प्रतिशत के बराबर है।

श्रीलंका के हाल के इतिहास में सबसे विनाशकारी चक्रवातों में से एक इस चक्रवात ने सभी 25 जिलों में करीब 20 लाख लोगों और पांच लाख परिवारों को बुरी तरह प्रभावित किया जिससे आजीविका, आवश्यक सेवाएं और व्यापक अर्थव्यवस्था बाधित हुई।

भाषा निहारिका

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