यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के बाद आयातित यूरोपीय कारें सस्ती होने की संभावना

यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के बाद आयातित यूरोपीय कारें सस्ती होने की संभावना

यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के बाद आयातित यूरोपीय कारें सस्ती होने की संभावना
Modified Date: January 27, 2026 / 09:57 pm IST
Published Date: January 27, 2026 9:57 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ अपने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत आयात शुल्क घटाने पर सहमति जताई है, जिससे आयातित यूरोपीय कारों की कीमतें कम हो सकती हैं। यह रियायत सालाना 2.5 लाख वाहनों के लिए दी गई है, जो पिछले साल ब्रिटेन को दी गई रियायत से छह गुना अधिक है।

यूरोपीय आयोग के अनुसार इस समझौते के बाद कारों पर लगने वाला शुल्क मौजूदा 110 प्रतिशत से धीरे-धीरे घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। यह लाभ प्रति वर्ष 2,50,000 वाहनों के कोटे तक सीमित होगा। आयोग ने कहा कि 2024 में यूरोप ने भारत को 1.6 अरब यूरो मूल्य के मोटर वाहनों का निर्यात किया था।

भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को एफटीए के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की।

ईयू को दिया गया यह कोटा भारत द्वारा पिछले साल ब्रिटेन के साथ किए गए अलग व्यापार सौदे में दी गई 37,000 इकाई की तुलना में छह गुना से भी ज्यादा है। इसे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, फॉक्सवैगन, रेनॉल्ट, लेम्बोर्गिनी और पोर्श जैसे यूरोपीय ब्रांडों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।

इस समय भारत 40,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक कीमत वाली यात्री कारों की पूरी तरह बनी इकाई (सीबीयू) के आयात पर 70 प्रतिशत बुनियादी सीमा शुल्क और 40 प्रतिशत एआईडीसी (कृषि बुनियादी ढांचा और विकास उपकर) लगाता है, जिससे प्रभावी दर 110 प्रतिशत हो जाती है। इसके अलावा 40,000 डॉलर तक की यात्री कारों के आयात पर 70 प्रतिशत शुल्क लगता है।

वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पहले साल कुछ खंड में शुल्क कटौती 35 प्रतिशत और कुछ में 30 प्रतिशत होगी। इसके बाद यह धीरे-धीरे घटकर 10 प्रतिशत तक आ जाएगी।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण


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