मोदी सरकार के 12 वर्षों में कृषि मंत्रालय का बजट पांच गुना बढ़ा

मोदी सरकार के 12 वर्षों में कृषि मंत्रालय का बजट पांच गुना बढ़ा

मोदी सरकार के 12 वर्षों में कृषि मंत्रालय का बजट पांच गुना बढ़ा
Modified Date: June 10, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: June 10, 2026 8:35 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में कृषि मंत्रालय का बजट लगभग पांच गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर ‘सार्वजनिक सेवा एक संकल्प’ शीर्षक से जारी पुस्तिका में यह जानकारी दी गई। वित्त वर्ष 2013-14 में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का बजट 27,663 करोड़ रुपये था।

पुस्तिका के मुताबिक, केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके तहत 2014 से 2025 के दौरान करीब 3,000 जलवायु-प्रतिरोधी फसल किस्में विकसित की गईं।

इसके अलावा, 26 करोड़ से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए जिससे किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग में मदद मिली।

सरकार ने अपनी उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ (पीएम-किसान) योजना के तहत अब तक 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि किसानों को हस्तांतरित की जा चुकी है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये तीन समान किस्तों में दिए जाते हैं।

उर्वरक सब्सिडी पर सरकार के व्यय का उल्लेख करते हुए पुस्तिका में कहा गया है कि 2024-25 में यह बढ़कर 2.21 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि 2014-15 में यह 75,000 करोड़ रुपये था। यूरिया पर करीब 90 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।

पुस्तिका के मुताबिक, इन प्रयासों की वजह से वित्त वर्ष 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 3,577 लाख टन तक पहुंच गया।

सरकार ने यह भी कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर पिछले 12 वर्षों में 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद की गई, जिससे किसानों को बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिली है।

केंद्र ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में कृषि निर्यात पांच लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो 2013-14 की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक है।

पुस्तिका के मुताबिक, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के दायरे में शामिल किसानों में 63 प्रतिशत अनुसूचित जाति/ जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वर्ग से संबंधित हैं।

जैविक खेती को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत लगभग 19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है। यह योजना 2015 में राष्ट्रीय टिकाऊ कृषि मिशन के तहत शुरू की गई थी।

इसके अलावा, 25 लाख से अधिक छोटे एवं सीमांत किसानों ने ‘सामाजिक सुरक्षा योजना पीएम किसान मानधन योजना’ में पंजीकरण कराया है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत अब तक किसानों के लगभग 11 करोड़ एग्रीस्टैक डिजिटल पहचान तैयार की जा चुकी हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण


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