भारत-यूरोपीय संघ ‘ऐतिहासिक व्यापार समझौते’ के बेहद करीबः यूरोपीय आयोग प्रमुख
भारत-यूरोपीय संघ 'ऐतिहासिक व्यापार समझौते' के बेहद करीबः यूरोपीय आयोग प्रमुख
नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लिएन ने मंगलवार को कहा कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) अगले सप्ताह शिखर सम्मेलन में ‘ऐतिहासिक व्यापार समझौते’ की घोषणा के करीब हैं। यह करीब 200 करोड़ लोगों के बाजार को जोड़ते हुए वैश्विक जीडीपी के एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगा।
यूरोपीय संघ की प्रशासकीय इकाई यूरोपीय आयोग की प्रमुख लिएन ने स्विट्जरलैंड को दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की सालाना बैठक में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत और ईयू के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का ऐलान एक ‘ऐतिहासिक अवसर’ होगा और यूरोप को दुनिया के तेजी से बढ़ते एवं गतिशील बाजार के साथ पहले कदम का लाभ देगा।
लिएन ने कहा, ‘मैं भारत की यात्रा पर जा रही हूं। हालांकि अभी काम बाकी है लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के करीब हैं। कुछ लोगों ने तो इसे सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौता कहा है। यह एक ऐसा समझौता होगा जो करीब 200 करोड़ लोगों का एक बाजार तैयार करेगा जो वैश्विक जीडीपी का करीब चौथाई हिस्सा होगा।’
लिएन यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा के साथ 25 से 27 जनवरी के बीच भारत दौरे पर रहेंगी। दोनों नेता गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ शिखर वार्ता का भी कार्यक्रम है।
इस शिखर सम्मेलन में एफटीए के अलावा दोनों पक्षों ने रक्षा ढांचा समझौता और 2026-2030 के लिए रणनीतिक एजेंडा तैयार करने की भी योजना है।
प्रस्तावित सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी (एसडीपी) दोनों पक्षों के बीच गहन रक्षा और सुरक्षा सहयोग को सक्षम करेगी और भारतीय कंपनियों को ईयू के ‘यूरोप के लिए सुरक्षा कार्रवाई’ (सेफ) कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर देगी।
लिएन ने वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे ईयू की प्राथमिकता में हैं।
उन्होंने कहा कि यूरोप ने ऊर्जा, कच्चे माल, रक्षा एवं डिजिटल क्षेत्रों में तेजी से कदम उठाए हैं और अब स्थायी बदलाव को अपनाकर अवसर का लाभ उठाना होगा।
भारत और यूरोपीय संघ 2004 से ही रणनीतिक साझेदार हैं। दोनों के बीच एफटीए पर पहली बार बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में रोक दी गई थी। जून 2022 में वार्ता फिर से बहाल हुई थी।
दोनों पक्ष अब व्यापार, निवेश, रक्षा और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में व्यापक समझौते पर सहमति बनाने के अंतिम चरण में हैं।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण


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