भारत को ईयू के नए नियमों के तहत अपने इस्पात निर्यात के लिए विशेष सुविधा की उम्मीद

भारत को ईयू के नए नियमों के तहत अपने इस्पात निर्यात के लिए विशेष सुविधा की उम्मीद

भारत को ईयू के नए नियमों के तहत अपने इस्पात निर्यात के लिए विशेष सुविधा की उम्मीद
Modified Date: January 27, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: January 27, 2026 10:27 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत यूरोपीय संघ को इस्पात निर्यात के लिए तरजीही सुविधाएं प्राप्त करने को लेकर आशावादी है, क्योंकि 27 देशों वाला यह समूह इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ नए इस्पात व्यापार नियमों पर बातचीत कर रहा है।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत भारत ने यूरोपीय संघ से आयात होने वाले अधिकांश लौह और इस्पात उत्पादों पर शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने पर सहमति जताई है।

समझौते के अनुसार, कुल उत्पाद श्रेणियों में से 6.1 प्रतिशत को विशेष सुविधा दी जाएगी। इन उत्पादों पर या तो आयात शुल्क कम किया जाएगा या फिर गाड़ियों और इस्पात के लिए सीमा शुल्क कोटा के माध्यम से रियायत दी जाएगी।

यूरोपीय संघ वर्तमान में एक नई, अधिक कड़ी इस्पात व्यापार व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जो मौजूदा सुरक्षा उपायों की जगह लेगी। इस बदलाव को नियंत्रित करने वाला मुख्य नियम नई इस्पात अधिशेष क्षमता नियमावली है, जिसे अक्टूबर 2025 में औपचारिक रूप से प्रस्तावित किया गया था और जो एक जुलाई 2026 से लागू होने वाली है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा, ‘यूरोपीय संघ ने इस्पात को लेकर नए प्रस्ताव पेश किए हैं और हमने ईमानदारी के साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है ताकि भारत, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का साझेदार होने के नाते, उन अधिकांश देशों की तुलना में बेहतर शर्तें हासिल कर सके जिनके साथ यूरोपीय संघ का कोई एफटीए नहीं है।’

उन्होंने उम्मीद जताई कि कुछ समय में इसका संतोषजनक समाधान हो जाएगा।

भारत वर्तमान में यूरोपीय संघ को लगभग 40 लाख टन इस्पात का निर्यात करता है। यूरोपीय संघ का इस्पात उच्च गुणवत्ता वाला है और भारत को अपने विनिर्माण क्षेत्रों के लिए इसकी आवश्यकता है।

एक अधिकारी ने बताया कि यूरोपीय संघ की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था समाप्त हो रही है और इसके स्थान पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के प्रावधानों के तहत नया इस्पात नियम लागू किया गया है।

इसके तहत ईयू उन सभी साझेदारों के साथ बातचीत करेगा जिनका उसके इस्पात बाजार में महत्वपूर्ण हित है।

अधिकारी ने कहा, ‘यह बातचीत डब्ल्यूटीओ में होगी… नए नियमों में कोटा 47 प्रतिशत घटा दिया गया है, जो हर आपूर्तिकर्ता के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। हमने प्रयास किया है कि एफटीए साझेदारों को गैर-एफटीए देशों की तुलना में अधिक कोटा मिले।’

उन्होंने आगे कहा, ‘एफटीए साझेदारों के लिए कोटा 47 प्रतिशत से कम होगा। अंतिम निर्णय डब्ल्यूटीओ में होने वाली बातचीत और समझौते के बाद तय होगा।’

भाषा योगेश पाण्डेय

पाण्डेय


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