भारत एआई में असाधारण सफर की ओर अग्रसर, हम इसमें भागीदार बनने को प्रतिबद्ध : पिचाई
भारत एआई में असाधारण सफर की ओर अग्रसर, हम इसमें भागीदार बनने को प्रतिबद्ध : पिचाई
नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने बुधवार को कहा कि भारत कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में एक ‘असाधारण सफर’ पर अग्रसर है और कंपनी देश के इस एआई बदलाव में भागीदार बनने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पिचाई ने कहा, ‘‘एआई हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा बदलाव है।’’ उन्होंने स्वास्थ्य जांच में सुधार से लेकर किसानों को वास्तविक समय में जानकारी व चेतावनी देने जैसी बड़ी चुनौतियों का व्यापक स्तर पर समाधान करने की इसकी क्षमता पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने उल्लेख किया कि भारत की विविधता, भाषाई परिवेश और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा इसे ‘नवाचार के लिए एक शक्तिशाली आधार’ और वैश्विक स्तर पर एआई के लोकतंत्रीकरण के लिए एक ठोस खाका बनाता है।
पिचाई ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को अपनाते समय विश्वास, सुरक्षा और समावेशन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘एआई को विभिन्न भाषाओं और स्थानीय संदर्भों में काम करना चाहिए। इसे ऐसे वास्तविक लाभ प्रदान करने चाहिए जिन पर लोग भरोसा कर सकें। विश्वास तब बढ़ता है जब प्रौद्योगिकी पारदर्शी, जिम्मेदार और ठोस परिणामों पर आधारित होती है।’’
गूगल सीईओ ने ‘इंडिया-अमेरिका कनेक्ट इनिशिएटिव’ की भी घोषणा की। यह अमेरिका, भारत और दक्षिणी गोलार्ध के कई स्थानों के बीच एआई संपर्क बढ़ाने के लिए समुद्र के नीचे नए केबल मार्ग बिछाने की एक परियोजना है।
पिचाई ने भारत में 15 अरब डॉलर के एआई केंद्र की पूर्व घोषणा का भी जिक्र किया, जिसमें गीगावाट-स्केल कंप्यूट और एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री केबल मार्ग होगा। इससे देश में रोजगार और उन्नत एआई बुनियादी ढांचा विकसित होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों और शुरुआती करियर वाले पेशेवरों के लिए अंग्रेजी और हिंदी में ‘गूगल एआई पेशेवर प्रमाणपत्र कार्यक्रम’ सहित महत्वाकांक्षी कौशल कार्यक्रमों का भी अनावरण किया।
अन्य पहल में दो करोड़ से अधिक लोक सेवकों की सहायता के लिए ‘कर्मयोगी भारत’ के साथ साझेदारी, 10,000 स्कूलों में जनरेटिव एआई उपकरण पेश करने के लिए ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ के साथ सहयोग और वैश्विक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए तीन करोड़ डॉलर का ‘एआई फॉर साइंस इम्पैक्ट चैलेंज’ शामिल है।
भाषा सुमित अजय
अजय

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