एआई एजेंट अपनाने में भारत सबसे आगे, एक-तिहाई उपयोगकर्ता कर रहे बहु-चरणीय काम: माइक्रोसॉफ्ट

एआई एजेंट अपनाने में भारत सबसे आगे, एक-तिहाई उपयोगकर्ता कर रहे बहु-चरणीय काम: माइक्रोसॉफ्ट

एआई एजेंट अपनाने में भारत सबसे आगे, एक-तिहाई उपयोगकर्ता कर रहे बहु-चरणीय काम: माइक्रोसॉफ्ट
Modified Date: September 3, 2026 / 09:20 pm IST
Published Date: September 3, 2026 9:20 pm IST

बेंगलुरु, तीन सितंबर (भाषा) भारत में कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल करने वाले करीब एक-तिहाई पेशेवर अब बहु-चरणीय कार्यों में एआई एजेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं और इनके जरिये काम करने के तरीके में बदलाव ला रहे हैं। माइक्रोसॉफ्ट की एक अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

माइक्रोसॉफ्ट के ‘2026 वर्क ट्रेंड इंडेक्स’ के अनुसार, अध्ययन में शामिल 10 बाजारों में भारत में इस तरह के ‘फ्रंटियर प्रोफेशनल’ की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 32 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ता बहु-चरणीय कार्यप्रवाह में एआई एजेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह वैश्विक औसत 16 प्रतिशत का दोगुना है।

भारत में 78 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ताओं ने कहा कि एआई उन्हें ऐसा काम करने में सक्षम बना रहा है, जो एक साल पहले संभव नहीं था। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 58 प्रतिशत रहा।

माइक्रोसॉफ्ट के भारत एवं दक्षिण एशिया क्षेत्र के अध्यक्ष पुनीत चंडोक ने कहा, ‘‘एक साल पहले भारत ने बड़े पैमाने पर इंसानों और एआई एजेंट की टीम बनाने की बात कही थी। अब आंकड़े बताते हैं कि हम ऐसा कर रहे हैं।’’

इस अध्ययन में 10 बाजारों के 20,000 एआई उपयोगकर्ताओं से मिली जानकारी और माइक्रोसॉफ्ट 365 के गुमनाम उत्पादकता आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 44 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि एआई को लेकर नेतृत्व और कर्मचारियों के बीच तालमेल है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 26 प्रतिशत है।

भारत में 63 प्रतिशत लोगों ने एआई के परिणामों की गुणवत्ता की जांच को प्राथमिकता बताया, जबकि 59 प्रतिशत ने आलोचनात्मक सोच को एआई-आधारित भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कौशल माना।

करीब 87 प्रतिशत भारतीय प्रतिभागियों ने कहा कि अंतिम सोच की जिम्मेदारी अब भी उनकी है और वे एआई के परिणाम को अंतिम जवाब के बजाय शुरुआती बिंदु के रूप में देखते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, 34 प्रतिशत भारतीय संगठनों में एआई एजेंट आधारित कार्यप्रवाह विभागीय स्तर पर लागू हो चुके हैं, जबकि वैश्विक औसत 26 प्रतिशत है।

भाषा यासिर योगेश प्रेम

प्रेम


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