व्हाट्सऐप ने भारत में बिल भुगतान सुविधा शुरू की
व्हाट्सऐप ने भारत में बिल भुगतान सुविधा शुरू की
नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) प्रौद्योगिकी कंपनी मेटा के स्वामित्व वाले मंच व्हाट्सऐप ने बृहस्पतिवार को भारत में बिल भुगतान सुविधा शुरू की। इसके तहत उपयोगकर्ता संदेश आदान-प्रदान करने की सुविधा देने वाले ऐप के जरिये बिजली, गैस, पानी समेत अपने रोजमर्रा के घरेलू बिलों का भुगतान आसानी से कर सकेंगे।
व्हाट्सऐप ने बयान में कहा कि भारत कनेक्ट (बीबीपीएस) नेटवर्क के सहयोग से शुरू की गई इस सुविधा के तहत उपयोगकर्ताओं को बिजली, गैस, पानी, फास्टैग, बीमा, क्रेडिट कार्ड और कर्ज भुगतान समेत 30 श्रेणियों में 22,722 बिल जारी करने वाले संस्थानों तक पहुंच मिलेगी।
बयान के अनुसार, व्हाट्सऐप पूरे देश में लोगों के लिए बिल भुगतान सुविधा चरणबद्ध तरीके से शुरू कर रहा है। आने वाले दिनों में यह सुविधा एंड्रॉयड तथा आईओएस के सभी संस्करणों के लिए उपलब्ध होगी।
उल्लेखनीय है कि भारत में डिजिटल भुगतान परिवेश पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इसके पीछे यूपीआई (एकीकृत पेमेंट इंटरफेस) को व्यापक रूप से अपनाया जाना, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और रोजमर्रा के लेनदेन की बढ़ती संख्या का ऑनलाइन होना प्रमुख कारण हैं।
कंपनी ने कहा, ‘‘व्हाट्सऐप पर बिल भुगतान के साथ लोग बिना व्हाट्सऐप छोड़े, संदेश भेजने जितनी आसानी से सुरक्षित तरीके से विभिन्न सेवाओं के लिए बिलों का भुगतान कर सकेंगे।’’
बयान के अनुसार, उपयोगकर्ता होम स्क्रीन के ऊपर दिए गए ‘आइकन’ पर टैप कर बिल भुगतान सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं, पुराने भुगतान और आगामी बिल देख सकते हैं, एक ही सेवा प्रदाता के तहत कई खातों का प्रबंधन कर सकते हैं और अपनी पसंद के भुगतान माध्यम से भुगतान कर सकते हैं।
मेटा (भारत) के प्रबंध निदेशक एवं क्षेत्रीय प्रमुख अरुण श्रीनिवास ने कहा कि लाखों भारतीयों के लिए व्हाट्सऐप परिवार और दोस्तों से जुड़े रहने, कंपनियों से बातचीत करने, नागरिक सेवाओं का इस्तेमाल करने और मेट्रो टिकट से लेकर बीमा तक की खरीदारी करने का सबसे आसान माध्यम है। इसके लिए ऐप से बाहर निकलने की भी जरूरत नहीं है।
श्रीनिवास ने कहा, ‘‘हम इसके जरिये बिल भुगतान की सुविधा को सुगम बना रहे हैं। अब अलग-अलग ऐप पर जाने या कई भुगतान तिथियों पर नजर रखने की जरूरत नहीं होगी। हम व्हाट्सऐप पर बिल का भुगतान संदेश भेजने जितना आसान बनाना चाहते हैं और देश के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंचाने में मदद करना चाहते हैं।’’
भाषा रमण अजय
अजय

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