भारत आर्थिक क्षेत्र के सभी साझेदारों के लिए खुला, वैश्विक कर्ज चिंताओं को लेकर सतर्क: वैष्णव
भारत आर्थिक क्षेत्र के सभी साझेदारों के लिए खुला, वैश्विक कर्ज चिंताओं को लेकर सतर्क: वैष्णव
(बरुण झा)
दावोस, 22 जनवरी (भाषा) विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत ने आर्थिक परिदृश्य के सभी क्षेत्रों में साझेदारी के लिए अपनी स्पष्ट इच्छा जाहिर की है और वैश्विक कर्ज से जुड़ी चिंताओं के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
वैष्णव ने यहां ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि यहां मौजूद सभी 10 राज्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद के मंत्र के अनुरूप अपनी संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है।
उन्होंने कहा, “यहां भारत का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री ने पिछले 11 वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था को किस तरह बदला और (क्षेत्रों के लिए) खोला है। इस बार का संदेश है कि भारत के साथ साझेदारी करें और भविष्य से जुड़ें।”
मंत्री ने कहा कि भारत ने दुनिया को यह भी बताया है कि वह नए विचारों के लिए भी खुला है।
उन्होंने कहा, “ चाहे सेमीकंडक्टर उद्योग हो, कृत्रिम मेधा (एआई) हो, विनिर्माण हो, हरित ऊर्जा हो या कोई अन्य क्षेत्र…हम हर जगह दुनिया के साथ साझेदारी करना चाहते हैं।”
यहां 10 राज्यों की भागीदारी पर उन्होंने कहा, “ सभी राज्य मेहनत कर रहे हैं और जब राज्य विकास करते हैं तो देश अपने आप विकसित होता है। प्रधानमंत्री मोदी का राज्य स्तर का अनुभव अब पूरे देश को लाभ पहुंचा रहा है।”
अमीर देशों में बढ़ते कर्ज को लेकर भारत की चिंता को लेकर किए सवाल पर वैष्णव ने कहा कि अपनी व्यापक आर्थिक एवं वित्तीय स्थिति को देखते हुए भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिनका कर्ज स्तर कम है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का कर्ज, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 57 प्रतिशत है जबकि सभी राज्यों को मिलाकर कुल स्तर पर यह अधिकतम 84-85 प्रतिशत तक जाता है। यह विकसित देशों के मुकाबले अब भी कम है जहां यह 120 प्रतिशत, 160 प्रतिशत और कुछ मामलों में 250-280 प्रतिशत तक है।
वैष्णव ने कहा कि कर्ज के ये ऊंचे स्तर स्वाभाविक रूप से अस्थिर हैं।
मंत्री ने कहा, “ जब कर्ज के ये पहाड़ ढहेंगे, तब यह समझना जरूरी होगा कि भारत जैसे देशों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।”
उन्होंने कहा, “अच्छी बात यह है कि भारत ने जानबूझकर अपने डॉलर कर्ज को कम रखा है और देश का कर्ज मुख्य रूप से रुपये में ही है।’’
वैष्णव ने कहा, “ डॉलर या विदेशी मुद्रा में कर्ज कम रखकर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती बढ़ती है। यह भारत को इस जोखिम से मुक्त करने का एक सचेत प्रयास है।”
इस बीच, क्रिकेट की उपमा देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) का परिवर्तन पांच मैच की टेस्ट श्रृंखला जैसा है और अभी तो पहले मैच का पहला दिन ही चल रहा है।
वैष्णव ने कहा कि एआई बदलाव की यात्रा लंबी है और इसमें भारत अहम भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत एआई की सभी पांच परतों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और अंतिम अनुप्रयोग परत में नेतृत्व की स्थिति हासिल करेगा।
एआई खाके की पांच परतों में ऊर्जा एवं बिजली उत्पादन, चिप व कंप्यूटिंग अवसंरचना, क्लाउड डेटा सेंटर, एआई मॉडल तथा अनुप्रयोग (एप्लिकेशन) शामिल हैं।
वैष्णव ने कहा कि भारत मध्यम परत में कुछ वास्तव में बेहतरीन संप्रभु मॉडल विकसित करेगा और बहुत जल्द चिप क्षेत्र में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र में पहले ही 70 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश देखने को मिल रहे हैं। अगले महीने होने वाले ‘इंडिया एआई शिखर सम्मेलन’ तक इसके 150 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
मंत्री ने कहा कि ऊर्जा के स्तर पर भी बड़े नवाचार हो रहे हैं और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हाल में घोषित सुधारों का लाभ भी भारत को मिलना शुरू हो जाएगा।
भाषा निहारिका रमण
रमण


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