भारत को विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम करनी चाहिए: उदय कोटक
भारत को विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम करनी चाहिए: उदय कोटक
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) वित्त क्षेत्र के दिग्गज उदय कोटक ने मंगलवार को कहा कि भारत को विदेशी पूंजी पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए और वास्तविक आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए दीर्घकालिक घरेलू जोखिम पूंजी का मजबूत आधार विकसित करना चाहिए।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में कोटक ने कहा कि वास्तव में आत्मनिर्भर देश वही होता है जो ‘‘किसी और के पैसे या ताकत पर निर्भर न हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ सच्चा आत्मनिर्भर देश वही है जिसे किसी और के धन या शक्ति पर निर्भर रहने की जरूरत न हो।’’
पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से विदेशी यात्राएं सीमित करने और जहां संभव हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने की अपील की है।
निजी क्षेत्र के बैंक कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक कोटक ने कहा कि वैश्विक माहौल तेजी से खंडित हो रहा है। देश अपने-अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए अपनी घरेलू आर्थिक बुनियाद को मजबूत करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कई कंपनियां तिमाही नतीजों, शेयर कीमतों आदि पर अत्यधिक ध्यान दे रही हैं। बजाय इसके उन्हें तीन से पांच साल के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
कोटक ने कहा, ‘‘ मैं कंपनियों से आग्रह करता हूं कि वे अल्पकालिक शेयर कीमतों पर अत्यधिक ध्यान न दें बल्कि तीन से पांच साल का लक्ष्य लेकर चलें।’’
उन्होंने साथ ही आगाह किया कि यदि तेल कीमतों में तेज वृद्धि होती है या विदेशी पूंजी प्रवाह उलट जाता है तो कमजोरियां सामने आ सकती हैं।
कोटक ने देश के निजी इक्विटी, वेंचर कैपिटल और वैकल्पिक परिसंपत्ति ढांचे को मजबूत करने की भी वकालत की और कहा कि ये संस्थान उद्यमिता और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी हैं।
उन्होंने पेंशन फंड और बीमा कंपनियों को नियामकीय सुरक्षा के साथ धीरे-धीरे निजी बाजारों में अधिक निवेश की अनुमति देने की भी वकालत की।
कोटक ने कहा कि म्यूचुअल फंड में खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने भारत की विदेशी पूंजी पर निर्भरता कम करने में मदद की है और जोखिम पूंजी का स्थिर स्रोत प्रदान किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे पास घरेलू बचत है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम सुनिश्चित करें कि म्यूचुअल फंड पर भरोसा बना रहे।’’
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा

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