भारत रणनीतिक तेल भंडार के दूसरे चरण का निर्माण पीपीपी मॉडल के तहत करेगा

भारत रणनीतिक तेल भंडार के दूसरे चरण का निर्माण पीपीपी मॉडल के तहत करेगा

भारत रणनीतिक तेल भंडार के दूसरे चरण का निर्माण पीपीपी मॉडल के तहत करेगा
Modified Date: July 23, 2026 / 05:39 pm IST
Published Date: July 23, 2026 5:39 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जुलाई (भाषा) भारत सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) कार्यक्रम के दूसरे चरण को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित करेगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 14,527 करोड़ रुपये है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि जुलाई 2021 में मंजूर एसपीआर कार्यक्रम के दूसरे चरण के तहत ओडिशा और कर्नाटक में दो भंडारण सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। इससे कुल 65 लाख टन वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक कच्चे तेल भंडारण क्षमता बढ़ेगी।

उन्होंने बताया कि ओडिशा में 40 लाख टन और कर्नाटक में 25 लाख टन क्षमता की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार अतिरिक्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित करने के लिए नए स्थानों का लगातार आकलन भी कर रही है।

मंत्री ने कहा कि पहले चरण के तहत इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (आईएसपीआरएल) के माध्यम से विशाखापत्तनम (13.3 लाख टन), मंगलुरु (15 लाख टन) और पादुर (25 लाख टन) में कुल 53.3 लाख टन क्षमता वाले रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित किए गए हैं।

ये सुविधाएं 2016 से 2018 के बीच चालू की गई थीं।

उन्होंने कहा कि इन भूमिगत भंडारों में रखे जाने वाले कच्चे तेल की मात्रा बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती है।

गोपी ने कहा, ‘पहले चरण के तहत एसपीआर सुविधाओं के विकास और निर्माण के लिए सरकार की ओर से कोई बजटीय सहायता नहीं दी गई थी। दूसरे चरण के लिए कुल 14,527 करोड़ रुपये की परियोजना लागत के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल प्रस्तावित है। इसमें सरकार की ओर से दी जाने वाली व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) सहायता कुल परियोजना लागत के 60 प्रतिशत तक सीमित होगी।’

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित करने के लिए नए स्थानों का आकलन एक निरंतर प्रक्रिया है।

गोपी ने बताया कि आईएसपीआरएल ने अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत संयुक्त अरब अमीरात की ऊर्जा कंपनी को मंगलुरु स्थित 7.5 लाख टन क्षमता वाले भूमिगत भंडार के उपयोग की अनुमति दी गई है।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने रणनीतिक सहयोग के लिए एक गैर-बाध्यकारी समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

भाषा योगेश निहारिका

निहारिका


लेखक के बारे में