भारत-अमेरिका समझौता: उद्योग को सोयाबीन तेल, पशु आहार में शुल्क कटौती पर स्पष्टता का इंतजार
भारत-अमेरिका समझौता: उद्योग को सोयाबीन तेल, पशु आहार में शुल्क कटौती पर स्पष्टता का इंतजार
नयी दिल्ली, आठ फरवरी (भाषा) भारत-अमेरिका अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उद्योग को शुल्क कटौती, कोटा तंत्र और गुणवत्ता विशिष्टताओं पर महत्वपूर्ण विवरणों का इंतजार है।
समझौते के तहत, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा, जबकि भारत अमेरिका के औद्योगिक सामानों और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क को खत्म या घटा देगा।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने कहा कि भारत की सोयाबीन तेल आयात पर भारी निर्भरता को देखते हुए समझौते का असर महत्वपूर्ण हो सकता है। खाद्य तेल वर्ष 2024-25 (नवंबर-अक्टूबर) के दौरान, भारत ने रिकॉर्ड 54.7 लाख टन सोयाबीन तेल आयात किया, जो मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से आया था और इसका अधिकांश हिस्सा जैविक रूप से संशोधित था।
वर्तमान में भारत अमेरिका से केवल 1.5 लाख से दो लाख टन सोयाबीन तेल आयात करता है, जिस पर 16.5 प्रतिशत शुल्क लगता है। इसमें 10 प्रतिशत बुनियादी कस्टम शुल्क, पांच प्रतिशत कृषि उपकर और 1.5 प्रतिशत शिक्षा उपकर शामिल हैं।
एसईए के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल भारत के लिए सामान्यतः प्रति टन 30-40 अमेरिकी डॉलर अधिक महंगा होता है, साथ ही अतिरिक्त लॉजिस्टिक लागत भी होती है, इसलिए शुल्क में कमी का फायदा भारतीय आयातकों को कम मिलेगा।’
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि क्या अमेरिकी सोयाबीन तेल को कोटा आधारित तरीके से बिना किसी मूल सीमा शुल्क के अनुमति दी जाएगी और क्या 6.5 प्रतिशत कृषि और शिक्षा शुल्क से छूट दी जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘हमें यह देखना होगा कि क्या शुल्क को घटाया या समाप्त किया जाएगा।’
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सोयाबीन तेल के आयात से अर्जेंटीना से होने वाला निर्यात कम हो सकता है और पाम तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ‘हम और विवरणों का इंतजार कर रहे हैं।’
एसईए अधिकारी ने कहा कि पशु आहार के शुल्क मुक्त आयात से देश में मवेशी और पोल्ट्री क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त आपूर्ति बढ़ेगी।
भारत इस समय लगभग 75 लाख से 80 लाख टन डिस्टिलर्स’ ड्राइड ग्रेन्स (डीडीजीएस) का उत्पादन करता है, जो मक्का और चावल का उप-उत्पाद है और सोया तथा रैपसीड मील की जगह लेता है।
मेहता ने चेतावनी दी, ‘अमेरिकी डीडीजीएस की आपूर्ति से घरेलू उत्पादन और कीमतों पर असर पड़ेगा, जिससे घरेलू प्रसंस्कर्ताओं पर प्रभाव पड़ेगा।’
सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग संघ (एसओपीए) के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक ने एक और चिंता व्यक्त की कि भारत ने अभी तक जैविक रूप से संवर्धित डीडीजीएस को मंजूरी नहीं दी है।
उन्होंने कहा, ‘इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि क्या अमेरिका से जीएम या गैर-जीएम डीडीजीएस आयात करने की अनुमति होगी। इसके अलावा, क्या इन आयातों के लिए कोटा निर्धारित किया जाएगा या नहीं, इस बारे में भी कोई स्पष्टता नहीं है।’
भाषा योगेश पाण्डेय
पाण्डेय

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