भारत-अमेरिका व्यापार करार से कुछ फल उत्पादक परेशान, तो कुछ ने बताया अवसर

Ads

भारत-अमेरिका व्यापार करार से कुछ फल उत्पादक परेशान, तो कुछ ने बताया अवसर

  •  
  • Publish Date - February 11, 2026 / 06:51 PM IST,
    Updated On - February 11, 2026 / 06:51 PM IST

श्रीनगर, 11 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर में कुछ फल उत्पादक और डीलर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले बुरे असर को लेकर परेशान हैं, लेकिन इस समूह में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि इस समझौते से कीमतें स्थिर होंगी और स्थानीय पैदावार की गुणवत्ता बेहतर होगी।

हालांकि, फल उत्पादकों की आम बिरादरी को लगता है कि यह व्यापार समझौता कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगी, जो राज्य काफी हद तक बागवानी पर निर्भर है।

दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के अखरोट उगाने वाले किसान और डीलर जावेद अहमद लोन ने कहा कि अमेरिका से आयातित सामान स्थानीय किसानों को अपना स्टॉक बेहतर करने पर मजबूर करेगा, यदि वे व्यवसाय में बने रहना चाहते हैं।

लोन ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘संरक्षणवाद हर समय किसानों के लिए अच्छा नहीं होता। वे लापरवाह हो जाते हैं क्योंकि उनके पास एक स्थापित बाजार होता है। उदाहरण के लिए, कश्मीर में स्थानीय बादाम और अखरोट की कीमत शेयर बाजार की तरह ऊपर-नीचे होती रहती है। किसी को नहीं पता कि क्या हो रहा है।’’

उन्होंने कहा कि अमेरिका से अखरोट और बादाम के लगातार आने से स्थानीय पैदावार के दाम भी स्थिर हो जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘आयातित अखरोट और बादाम की गुणवत्ता बेहतर है और शुल्क के कारण वे पहले से ही बहुत प्रतिस्पर्धी थे। स्थानीय किसानों को भी अपनी गुणवत्ता सुधारनी होगी। प्रतिस्पर्धा का यही फायदा है।’’

फल उगाने वालों और डीलर यूनियन के अध्यक्ष, बशीर अहमद बशीर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि आयातित सेबों पर कम शुल्क से कश्मीर और हिमाचल के सेबों को बहुत नुकसान होगा।

बशीर ने कहा, ‘‘ईरान, अमेरिका, न्यूज़ीलैंड से सेब के आयात से छोटे किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। बढ़ती लागत, मौसम में अचानक बदलाव और कीटों के फैलने से पूरा बागवानी क्षेत्र वित्तीय संकट में आ गया है। शुल्क में कमी ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।’’

उन्होंने कहा कि विदेशी सेबों पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाना समय की मांग है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर भारत में आयातित सेबों को खुली छूट मिल गई, तो बागवानी अर्थव्यवस्था संकट में पड़ जाएगी।’’

बागवानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में करीब 20 लाख लोग सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर बागवानी की गतिविधियों से अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को भारत-अमेरिकी अंतरिम व्यापार समझौते पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि इससे केंद्र शासित प्रदेश की सूखे मेवे और बागवानी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है।

अब्दुल्ला ने कहा कि अखरोट और बादाम जैसे मेवों और फलों के शुल्क मुक्त आयात से स्थानीय किसानों को नुकसान हो सकता है। अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘पेडों से प्राप्त होने वाले खाद्य उत्पाद (ट्री नट्स), अखरोट और बादाम जम्मू-कश्मीर से आते हैं। इन उत्पादों के बाहर से शुल्क मुक्त आयात की इजाज़त देना हमारे किसानों के लिए ठीक नहीं है।’’

विपक्षी पार्टी पीडीपी ने दावा किया कि अगर अमेरिका से खेती और बागवानी के सामान के आयात पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया तो भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था के लिए बर्बादी का कारण बनेगी।

पीडीपी के प्रवक्ता मोहम्मद इकबाल ट्रंबू ने कहा, ‘‘उन्होंने जम्मू-कश्मीर के बागवानी क्षेत्र पर भारत अमेरिका व्यापार समझौता के असर के बारे में नहीं सोचा है। अमेरिका से आयात होने वाले कृषि उत्पादों पर शून्य शुल्क होगा। ऐसे में जम्मू-कश्मीर में पैदा होने वाले सेब और अखरोट का क्या होगा?’’

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय