नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर अमेरिका का नया वैश्विक शुल्क ढांचा तैयार होने के बाद ही किए जाएंगे। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ अंततः हर देश एक पैकेज के हिस्से के रूप में ऐसा समझौता करता है जिसमें उसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तुलनात्मक लाभ मिलता है।’’
भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक ढांचे को अंतिम रूप देने की घोषणा पिछले महीने की थी। इस ढांचे के तहत अमेरिका ने भारत पर शुल्क 18 प्रतिशत तक कम करने पर सहमति जताई थी।
अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्क को निरस्त करने के बाद हालांकि अमेरिका में शुल्क ढांचे में बदलाव किया गया है। फैसले के बाद ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू कर दिया है।
इन बदलावों के मद्देनजर भारत और अमेरिका के मुख्य वार्ताकारों की बैठक को स्थगित कर दिया गया है। वे पिछले महीने समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए मिलने वाले थे और इस महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने थे लेकिन उस समय अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईपीएल) से जुड़े शुल्क पर उच्चतम न्यायालय का फैसला नहीं आया था। अब उस फैसले के बाद वे शुल्क अस्तित्व में नहीं हैं।’’
उन्होंने कहा कि अब अनुच्छेद 122 के तहत शुल्क लागू हैं जो भुगतान संतुलन संकट से जुड़े हैं और पांच महीनों के लिए करीब 10 प्रतिशत हैं। इसलिए भारत-अमेरिका समझौते को ऐसे शुल्क ढांचे के आधार पर ही अंतिम रूप दिया जाएगा जिससे अमेरिका के बाजार में भारत को तुलनात्मक लाभ मिल सके।
अधिकारी ने कहा कि अमेरिका फिलहाल एक नया वैश्विक शुल्क ढांचा तैयार करने पर काम कर रहा है.. ‘‘ जब वह इसे तैयार कर लेगा, तब ही समझौते पर हस्ताक्षर करना उचित होगा।’’
उन्होंने कहा कि समझौते की रूपरेखा पहले ही तय हो चुकी है और दोनों पक्ष इसके बारीक पहलुओं पर बातचीत कर रहे हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ हालांकि, मेरा मानना है कि हस्ताक्षर तब ही किए जाएंगे जब वैश्विक स्तर पर नया शुल्क ढांचा स्थापित हो जाएगा।’’
भारत पर 18 प्रतिशत शुल्क के संभावित बदलाव के बारे में अधिकारी ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नया वैश्विक ढांचा किस तरह बनता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ यदि वैश्विक ढांचा वही रहता है जैसा आईईईपीए शुल्क के समय था, तो यह दर बनी रह सकती है। यदि ढांचा अलग हुआ तो इसमें बदलाव भी हो सकता है।’’
अधिकारी ने कहा कि जब भारत ने समझौते को अंतिम रूप दिया था तब उसे अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले तुलनात्मक लाभ प्राप्त था।
उन्होंने कहा, ‘‘ जब भी हम तैयार होंगे और अमेरिका का शुल्क ढांचा भी तैयार होगा, तब समझौते पर हस्ताक्षर करना उचित होगा। इसमें कोई गतिरोध नहीं है और न ही ऐसा है कि समझौता नहीं है।’’
यह व्यापार समझौता दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों में तुलनात्मक और प्राथमिकता आधारित पहुंच देने से जुड़ा है। भारत पर प्रस्तावित 18 प्रतिशत शुल्क उसके प्रतिस्पर्धी देशों चीन, वियतनाम और थाइलैंड की तुलना में कम था।
अधिकारी ने कहा कि यदि नए शुल्क ढांचे में अन्य देशों पर 19, 20, 21 या 22 प्रतिशत शुल्क होता है तो भारत 18 प्रतिशत पर बना रह सकता है। हालांकि, यदि अन्य देशों के शुल्क कम होते हैं तो भारत के लिए भी दर घट सकती है।
इस बीच कुछ खबरों के अनुसार मलेशिया ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौते को आगे नहीं बढ़ा रहा है।
अधिकारी ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौता करने वाले देशों के दो समूह हैं। एक वे जिन्होंने रूपरेखा घोषित कर कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और दूसरे वे जिन्होंने अभी कानूनी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
अमेरिका के धारा 301 के तहत शुरू की गई दो जांच के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय इसके कानूनी प्रभाव का आकलन कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘ इन जांच में समय लगता है। मेरा मानना है कि जब भविष्य में व्यापार समझौता का अंतिम रूप तय होकर इस पर हस्ताक्षर होने के साथ ही ये जांच स्वतः समाप्त हो जाएंगी।’’
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने धारा 301 के तहत 12 मार्च को एक जांच शुरू की जिसमें भारत और चीन सहित 60 देश शामिल हैं। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन अर्थव्यवस्थाओं की नीतियां और कार्यप्रणालियां, (विशेषकर जबरन श्रम से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लागू न करने से जुड़ी) क्या अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं और क्या वे अमेरिकी व्यापार को प्रभावित करती हैं।
इसके बाद यूएसटीआर ने 11 मार्च को 16 देशों की नीतियों एवं औद्योगिक प्रथाओं को निशाना बनाते हुए धारा 301 के तहत एक और व्यापार जांच शुरू की थी। इन देशों में भी भारत और चीन शामिल हैं।
वहीं वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने व्यापार समझौते पर कहा, ‘‘ भारत परस्पर लाभकारी व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के साथ लगातार बातचीत कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि समझौते के कई पहलू हैं और भारत उनके विवरण पर अमेरिका के साथ चर्चा कर रहा है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘ कुछ गैर-शुल्क बाधाएं हैं जिन्हें दूर करना है। धारा 232 से जुड़े शुल्क के तहत भी कुछ पहलुओं पर काम करना है। इसलिए हम इस समय का रचनात्मक उपयोग कर रहे हैं ताकि जब समझौते पर हस्ताक्षर का समय आए तो ये मुद्दे देरी का कारण न बनें।’’
भाषा निहारिका अजय
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