भारत ने शुल्क लगाने को उचित ठहराने के लिए ‘पारदर्शिता’ के दुरूपयोग को लेकर आगाह किया

भारत ने शुल्क लगाने को उचित ठहराने के लिए ‘पारदर्शिता’ के दुरूपयोग को लेकर आगाह किया

भारत ने शुल्क लगाने को उचित ठहराने के लिए ‘पारदर्शिता’ के दुरूपयोग को लेकर आगाह किया
Modified Date: March 28, 2026 / 04:13 pm IST
Published Date: March 28, 2026 4:13 pm IST

नयी दिल्ली, 28 मार्च (भाषा) भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्यों को चेतावनी दी है कि वे शुल्क लगाने को उचित ठहराने या वैध घरेलू नीतियों को चुनौती देने के लिए डब्ल्यूटीओ के ‘पारदर्शिता’ प्रावधान का दुरुपयोग न करें।

भारत ने कहा कि ‘पारदर्शिता’ को निरंतर क्षमता निर्माण सहायता के जरिये समर्थन दिया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी देश निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से अपने दायित्वों का पालन करें।

डब्ल्यूटीओ के व्यापार में तकनीकी बाधाओं से संबंधित समझौते में ‘पारदर्शिता’ एक महत्वपूर्ण भाग है। इसके तहत, सदस्य देशों को अपनी व्यापार नीतियों, सब्सिडी और नियामक उपायों के बारे में नियमित और स्पष्ट रूप से जानकारी साझा करनी होती है।

अमेरिका डब्ल्यूटीओ सुधार प्रस्ताव के तहत अनिवार्य खुलासों पर सख्त नियमों के लिए दबाव डाल रहा है। उसका आरोप है कि कई देश डब्ल्यूटीओ को सब्सिडी, शुल्क या नीतिगत बदलावों की सूचना समय पर नहीं देते हैं।

डब्ल्यूटीओ के विकासशील सदस्य देश सैद्धांतिक रूप से पारदर्शिता के महत्व से सहमत हैं, लेकिन अमेरिका द्वारा इसे लागू करने के तरीके पर उन्हें गंभीर आपत्ति है। उभरती अर्थव्यवस्थाएं सूचना न देने पर लगने वाले जुर्माने का विरोध कर रही हैं। उनका तर्क है कि कई देशों में क्षमता की कमी है।

वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘भारत ने विश्व व्यापार संगठन के सदस्यों को चेतावनी दी है कि वे व्यापार में बदले की कार्रवाई के तहत शुल्क लगाने को उचित ठहराने या वैध घरेलू नीतियों को चुनौती देने के लिए ‘पारदर्शिता’ का दुरुपयोग न करें। भारत ने कहा है कि सभी सदस्यों, विशेषकर विकासशील देशों को, निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से अपने दायित्वों को पूरा करने में सक्षम बनाने के लिए निरंतर क्षमता निर्माण सहायता की आवश्यकता है।’’

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यह मुद्दा 27 मार्च को कैमरून के याउंडे में चल रहे 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी14) के ‘समान अवसर के मुद्दों’ पर एक सत्र में उठाया था। मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 166 सदस्यीय बहुपक्षीय संगठन का निर्णय लेने वाला सर्वोच्च निकाय है। इसकी बैठक हर दो साल में एक बार होती है।

भारत ने सभी सदस्यों के लिए उत्पादक क्षमता निर्माण, रोजगार सृजन और वैश्विक व्यापार में सार्थक भागीदारी के लिए उचित अवसर के महत्व पर भी जोर दिया है।

एक अलग सत्र में, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि देश समयबद्ध सुधार प्रयासों की पुनः शुरुआत का समर्थन करता है, लेकिन यह अधिक ठोस साक्ष्य विश्लेषण और प्रस्तुतियां और मंत्रिस्तरीय निर्णयों के साथ जुड़ाव के माध्यम से होना चाहिए।

बयान के अनुसार, ‘‘भारत ने स्पष्ट रूप से चुनिंदा मुद्दों को उठाने और पूर्वकल्पित और पूर्वाग्रही दृष्टिकोणों को बढ़ावा देने से बचने का आह्वान किया।’’

इसमें कहा गया है कि कुछ सदस्यों देशों के बीच आपसी समझौतों के प्रति भी आगाह किया और कहा कि वे बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को विभाजित करते हैं। अग्रवाल ने सर्वसम्मति प्रक्रिया को खुलेपन, पारदर्शिता, समावेश, सहभागिता और सदस्य-संचालित सिद्धांतों पर आधारित करने का आह्वान किया।

सम्मेलन के दौरान, गोयल ने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ द्विपक्षीय बैठक की और प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के लिए वार्ता की प्रगति की स्थिति का आकलन किया।

भाषा रमण योगेश

रमण


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