जनवरी में भारत का डीओसी निर्यात 42 प्रतिशत घटा

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जनवरी में भारत का डीओसी निर्यात 42 प्रतिशत घटा

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 07:05 PM IST

नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) सोयाबीन तेल-रहित खल (डी-आयल्ड केक या डीओसी) और रैपसीड डीओसी की निर्यात खेप में गिरावट की वजह से जनवरी में भारत का डीओसी निर्यात साल-दर-साल 42 प्रतिशत घटकर 2,60,123 टन रह गया। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एसईए) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

जनवरी, 2025 में डीओसी निर्यात 4,52,352 टन का हुआ था।

अप्रैल-जनवरी, 2025-26 के दौरान, डीओसी निर्यात एक साल पहले के इसी समय के 36 लाख टन से घटकर 32 लाख टन रह गया।

डीओसी का इस्तेमाल जानवरों के चारे के तौर पर किया जाता है।

जनवरी, 2026 में सोयाबीन डीओसी का निर्यात एक साल पहले के 286,287 टन से घटकर 1,32,440 टन रह गया, जबकि रैपसीड डीओसी निर्यात की खेप 1,31,641 टन से घटकर 64,782 टन रह गई। मूंगफली डीओसी का निर्यात भी 2,636 टन से घटकर 1,067 टन रह गया।

चावल की भूसी निकालने का रुख उल्टा रहा, जो जनवरी, 2025 के सिर्फ 63 टन से बढ़कर 35,367 टन हो गया।

एसईए ने रैपसीड डीओसी में गिरावट की वजह पेराई गतिविधियों में कमी को बताया क्योंकि प्रसंस्करणकर्ता फरवरी और मार्च में होने वाली नई फसल की आपूर्ति का इंतज़ार कर रहे थे।

कांडला में भारतीय रैपसीड डीओसी का भाव 20,300 रुपये प्रति टन था, जो नवंबर-दिसंबर 2025 में 18,500 रुपये था। हालांकि, यह जनवरी के 21,617 रुपये के उच्चतम स्तर से नीचे था। डॉलर के हिसाब से, कांडला में भारतीय रैपसीड डीओसी की कीमत 235 डॉलर प्रति टन थी, जबकि हैम्बर्ग में यूरोपीय संघ मूल वाली डीओसी की कीमत 276 डॉलर प्रति टन थी।

चीन, दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश और जर्मनी भारतीय डीओसी के मुख्य खरीदार हैं।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय