नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) कमजोर निवेश और खपत में वृद्धि के अलावा पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न व्यापारिक झटकों के कारण चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत थी। फिच समूह की कंपनी बीएमआई ने यह बात कही।
पिछले सप्ताह जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 7.1 प्रतिशत थी। यह वृद्धि मजबूत खपत और सशक्त निवेश गतिविधियों के समर्थन से हुई।
बीएमआई को उम्मीद है कि चालू कैलेंडर वर्ष में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.1 के स्तर के आसपास कारोबार करेगा। 2025 में 87 के औसत स्तर से रुपये में गिरावट निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी, जिससे ईरान संघर्ष के कारण व्यापार की शर्तों पर पड़े नकारात्मक प्रभाव की भरपाई होगी।
सितंबर 2025 में लागू माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के कारण वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में खपत में उछाल आया। इसके बाद, जनवरी-मार्च तिमाही में खपत वृद्धि सालाना आधार पर 1.1 प्रतिशत अंक घटकर 7.1 प्रतिशत रह गई।
बीएमआई ने कहा, ‘‘ हम वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाते हैं। हमारा यह अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 की 7.7 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना में स्पष्ट मंदी दर्शाता है, लेकिन पिछले एक दशक की औसत 6.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से अधिक है।’’
बीएमआई का यह अनुमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6.6 प्रतिशत वृद्धि अनुमान के अनुरूप है।
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