भारत का निर्यात मार्च में 7.44 प्रतिशत घटा, व्यापार घाटा कम हुआ

भारत का निर्यात मार्च में 7.44 प्रतिशत घटा, व्यापार घाटा कम हुआ

भारत का निर्यात मार्च में 7.44 प्रतिशत घटा, व्यापार घाटा कम हुआ
Modified Date: April 15, 2026 / 08:35 pm IST
Published Date: April 15, 2026 8:35 pm IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के कारण बीते माह वस्तु निर्यात में पांच महीनों में सबसे बड़ी गिरावट आई और यह 7.44 प्रतिशत घटकर 38.92 अरब अमेरिकी डॉलर पर रहा। वहीं आयात में छह प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

हालांकि, आयात में कमी के कारण व्यापार घाटा मार्च में घटकर नौ महीनों के निचले स्तर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया।

आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल और सोने के आयात में उल्लेखनीय कमी के कारण मार्च में कुल आयात 6.51 प्रतिशत घटकर 59.59 अरब डॉलर रहा।

हालांकि, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात 0.93 प्रतिशत बढ़कर अबतक के उच्चतम स्तर 441.78 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि आयात 7.45 प्रतिशत बढ़कर 775 अरब डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष के दौरान सोने और चांदी के आयात में उछाल के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर रहा

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने संवाददाताओं को बताया कि देश के वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में 4.22 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है और यह 2025-26 में 860.09 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जबकि 2024-25 में यह 825.26 अरब अमेरिकी डॉलर था।

उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय निर्यातक मजबूती दिखा रहे हैं और सकारात्मक वृद्धि दर्ज कर रहे हैं।

सचिव ने बताया कि मार्च में पश्चिम एशिया क्षेत्र को भारत के निर्यात में 57.95 प्रतिशत की गिरावट आई है। भारत एक माह में पश्चिम एशिया को छह अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात करता है। हालांकि, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण आपूर्ति में बाधा आई, जिससे रत्न और आभूषण, चावल, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्यात में गिरावट के चलते निर्यात घटकर लगभग 2.0 से 2.5 अरब डॉलर रह गया।

इस क्षेत्र से आयात में मार्च में 57.95 प्रतिशत की गिरावट आई।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘मार्च में पश्चिम एशिया को निर्यात में 3.5 अरब डॉलर की की कमी आई है और इसका असर निर्यात पर पड़ा है।’’

अग्रवाल ने कहा कि संघर्ष के कारण अप्रैल का महीना भी निर्यात के लिए कठिन साबित हो सकता है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की आवाजाही बाधित हो रही है।

मार्च में व्यापार घाटा कम होकर नौ महीनों में सबसे कम 20.67 अरब डॉलर पर आ गया।

कच्चे तेल का आयात मार्च में 35.91 प्रतिशत घटकर 12.18 अरब डॉलर रहा, जबकि 2025-26 में यह 6.37 प्रतिशत घटकर 174 अरब डॉलर रहा।

आंकड़ों के अनुसार, मार्च में सोने का आयात 31.63 प्रतिशत घटकर 3.06 अरब डॉलर रहा, जबकि 2025-26 में यह 24 प्रतिशत बढ़कर 71.97 अरब डॉलर रहा।

पश्चिम एशिया क्षेत्र में युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही बाधित हुई है। इससे निर्यातकों के लिए माल ढुलाई और बीमा लागत बढ़ गई है।

सचिव ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे लंबे समय तक नहीं रहेंगी और आने वाले महीनों में विश्व भर में व्यापार सुचारू रूप से चलेगा।’’

अग्रवाल ने कहा कि सेवाओं का निर्यात मजबूत बना हुआ है।

अनुमान के अनुसार, मार्च में सेवाओं का निर्यात घटकर 35.20 अरब डॉलर रहा, जबकि मार्च, 2025 में यह 35.63 अरब डॉलर था। आयात भी घटकर 16.96 अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि पिछले साल मार्च में यह 17.48 अरब डॉलर था।

बीते वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सेवाओं के निर्यात का अनुमानित मूल्य 418.31 अरब डॉलर रहा, जो 2024-25 में 387.55 अरब डॉलर था। पिछले वित्त वर्ष के दौरान आयात 204.42 अरब डॉलर रहा, जो 2024-25 के 198.72 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।

निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो ने वित्त वर्ष 2025–26 में भारत के बेहतर विदेश व्यापार प्रदर्शन का स्वागत किया है।

फियो के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा, ‘‘खासकर वैश्विक अनिश्चितताओं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाएं और मांग में उतार-चढ़ाव के बीच निर्यात में 860 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह भारतीय निर्यातकों की मजबूती को बताता है।’’

अमेरिका, यूएई, चीन, नीदरलैंड और ब्रिटेन निर्यात के मुख्य गंतव्य बने रहे।

फियो ने बाजारों में और विविधता लाने और भारत की वैश्विक पहुंच का विस्तार करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने की जरूरत बतायी।

भाषा रमण अजय

अजय


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