भारत का विदेश व्यापार 2030 तक 1,200 अरब डॉलर बढ़ सकता है: जीटीआरआई रिपोर्ट
भारत का विदेश व्यापार 2030 तक 1,200 अरब डॉलर बढ़ सकता है: जीटीआरआई रिपोर्ट
नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) बंदरगाह और सीमा शुल्क परिचालन को सुव्यवस्थित करने और राष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क की स्थापना जैसे उपायों से भारतीय कंपनियों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जुड़ने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही देश 2030 तक विदेश व्यापार में 1,200 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि कर सकता है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही। जीटीआरआई ने कहा कि इस समय विभिन्न जीवीसी-प्रासंगिक उत्पाद श्रेणियों में पर्याप्त विनिर्माण क्षमता होने के बावजूद वैश्विक मूल्य श्रृंखला (जीवीसी) में भारत की सीमित भागीदारी के चलते देश की निर्यात क्षमता बाधित होती है।
जीवीसी में भारतीय कंपनियों का एकीकरण जरूरी है, क्योंकि लगभग 70 प्रतिशत वैश्विक व्यापार इन श्रृंखलाओं के भीतर संचालित होता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी से लेकर दवा और परिधान तक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।
जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत के कमजोर जीवीसी एकीकरण के लिए खराब व्यापार बुनियादी ढांचा को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इससे बंदरगाहों और सीमा शुल्क को लेकर देरी होती है।
उन्होंने कहा कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, थाइलैंड और मलेशिया जैसे देशों ने गुणवत्तापूर्ण व्यापार बुनियादी ढांचे में निवेश करते जीवीसी में अच्छा प्रदर्शन किया है।
जीटीआरआई रिपोर्ट में सरकार के लिए छह कार्य बिंदुओं की सिफारिश की गई है। इन सिफारिशों में बंदरगाह और सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को स्वचालित करना, 99 प्रतिशत निर्यात के लिए ग्रीन चैनल मंजूरी, भारत के निर्यात में 85 प्रतिशत योगदान देने वाले शीर्ष 10,000 निर्यातकों का विश्लेषण, जहाज को खाली करने में लगने वाले समय के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन करना, कतार में कमी लाना और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग शामिल हैं।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय

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