चालू वित्त वर्ष के पहले 11 माह में चीन को भारत का तेल रहित खल का निर्यात 20 गुना बढ़ा

चालू वित्त वर्ष के पहले 11 माह में चीन को भारत का तेल रहित खल का निर्यात 20 गुना बढ़ा

चालू वित्त वर्ष के पहले 11 माह में चीन को भारत का तेल रहित खल का निर्यात 20 गुना बढ़ा
Modified Date: March 19, 2026 / 05:12 pm IST
Published Date: March 19, 2026 5:12 pm IST

नयी दिल्ली, 19 मार्च (भाषा) उद्योग निकाय एसईए ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में चीन को भारत का तेल रहित खल अथवा डी-आयल्ड केक (डीओसी) निर्यात 20 गुना से ज़्यादा बढ़कर 7.79 लाख टन हो गया है। इसकी वजह है कि प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारतीय डीओसी के सस्ता होने से मांग बढ़ गई।

हालांकि, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने कहा कि आगे चलकर निर्यात को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

भारत ने अप्रैल, 2025-फरवरी, 2026 के दौरान चीन को 7,79,016 टन डीओसी (मुख्य रूप से रैपसीड डीओसी) निर्यात किया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 38,240 टन था।

चीन ने चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान 7,71,435 टन रैपसीड डीओसी और 7,581 टन अरंडी डीओसी का आयात किया।

एसईए के कार्यकारी निदेशक बी वी मेहता ने निर्यात में इस उछाल की वजह यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं के मुकाबले प्रतिस्पर्धी कीमतों को बताया।

उन्होंने कहा कि भारतीय रैपसीड डीओसी की कीमत अभी लगभग 225 डॉलर प्रति टन (एफओबी/एफएएस कांडला) है, जो 297 डॉलर प्रति टन वाले रैपसीड डीओसी एचबीजी एक्स-मिल से सस्ता है।

मेहता ने कहा, ‘‘मार्च, 2025 में, चीन ने कनाडा के इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाए गए शुल्क के जवाब में कनाडाई रैपसीड डीओसी और तेल पर 100 प्रतिशत शुल्क लगा दिया था। इन शुल्कों के कारण कनाडाई निर्यात आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं रह गया है, जिससे चीन को दूसरे आपूर्तिकर्ताओं की ओर देखना पड़ रहा है, और इस आपूर्ति अंतर को भरने में भारत को मुख्य फायदा हुआ।’’

हालांकि, एक मार्च, 2026 से चीन ने कनाडाई कैनोला (रैपसीड) डीओसी पर लगे इन 100 प्रतिशत शुल्क को 31 दिसंबर, 2026 तक के लिए निलंबित कर दिया है।

मेहता ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, भारतीय रैपसीड डीओसी के निर्यातकों को चीनी बाज़ार में अपनी जगह बनाए रखने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।

इस बीच, एसईए ने बताया कि फरवरी में भारत का कुल डीओसी निर्यात 22 प्रतिशत घटकर 2,57,961 टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 3,30,319 टन था।

इस वित्त वर्ष के पहले 11 माह के दौरान डीओसी का कुल निर्यात 11 प्रतिशत घटकर 34,93,823 टन रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 39,33,349 टन था।

एसईए ने कहा, ‘‘अमेरिका/इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने भारत के डीओसी निर्यात को काफ़ी हद तक बाधित किया है, खासकर पश्चिम एशिया और यूरोप के लिए, क्योंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य और लाल सागर के आसपास अस्थिरता है।’’

एसोसिएशन ने कहा कि भारत का लगभग 20 प्रतिशत डीओसी निर्यात, जो पश्चिम एशिया के लिए है, और 15 प्रतिशत जो यूरोप के लिए है, लॉजिस्टिक्स और पोत परिवहन में रुकावटों के कारण जोखिम में हैं।

मेहता ने कहा, ‘‘पोत परिवहन कंपनियां लाल सागर और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बचने की कोशिश कर रही हैं, जिससे जहाज़ों को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इससे यात्रा का समय और लागत बढ़ जाती है, जिससे पश्चिम एशिया और यूरोप को होने वाले डीओसी निर्यात की निरंतरता खतरे में पड़ गई है।’’

एसईए ने कहा कि केप ऑफ़ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाने के कारण शिपिंग यात्राओं में 10-15 दिन ज़्यादा लगते हैं, जिससे देरी होती है और कंटेनर की कमी हो जाती है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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