नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) एक उद्योग निकाय ने बृहस्पतिवार को कहा कि फरवरी में भारत का कच्चा सूरजमुखी तेल आयात 51 प्रतिशत घटकर 1,45,000 टन रह गया, क्योंकि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और काला सागर पोत परिवहन मार्ग में रुकावटों ने कीमतों को तेज़ी से बढ़ा दिया।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने कहा कि कच्चे सूरजमुखी तेल का औसत आयात मूल्य फरवरी में 17 प्रतिशत बढ़कर 1,420 डॉलर प्रति टन हो गया, जो एक साल पहले 1,216 डॉलर था, जबकि पिछले साल रुपये में 4.2 प्रतिशत की गिरावट ने आयातकों और रिफाइनिंग करने वालों के लिए लागत बढ़ा दी।
एसईए ने कहा कि रूस और यूक्रेन मिलकर भारत के सूरजमुखी तेल आयात का 70-90 प्रतिशत हिस्से की आपूर्ति करते हैं। काला सागर निर्यात मार्ग पर युद्ध से जुड़ी रुकावटों और लाल सागर और स्वेज़ नहर में तनाव की वजह से आपूर्ति कम हो गई है और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है।
एसईए ने बयान में कहा, ‘‘…मौजूदा युद्ध— खासकर लाल सागर और स्वेज़ नहर में संभावित रुकावटों — से निर्यात खेप में देरी होने, लॉजिस्टिक खर्च बढ़ने और उपलब्धता पर असर पड़ने का खतरा है।’’
नवंबर, 2025 में शुरू होने वाले तेल वर्ष 2025-26 के पहले चार महीनों में आयात एक साल पहले के 11.2 लाख टन से घटकर 9.04 लाख टन रह गया।
एसईए ने कहा, ‘‘रूस और पूर्वी यूरोप से सूरजमुखी तेल के आयात में रुकावट और पाम तेल के ज़्यादा माल ढुलाई खर्च के कारण कीमतें बढ़ी हैं, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों से निपटने के लिए स्थिति पर करीब से नज़र रखनी पड़ रही है।’’
काला सागर आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के लिए, भारत मर्कोसुर देशों — अर्जेंटीना, ब्राज़ील, पैराग्वे और उरुग्वे — के साथ लंबे समय के सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के अनुबंध के लिए बातचीत कर रहा है।
इस टकराव से भारत के खाद्य तेल डी-आयल्ड केक (तेल रहित खल या डीओसी) निर्यात को भी खतरा है, क्योंकि लॉजिस्टिक दिक्कतों से दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया में इनकी खेपों पर असर पड़ सकता है, जो कुल खाद्य तेल डीओसी निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत भाग है।
फरवरी में कुल वनस्पति तेल आयात – खाद्य एवं अखाद्य – पिछले साल के इसी समय के मुकाबले छह प्रतिशत बढ़कर 53.24 लाख टन हो गया। पाम तेल का आयात 8.47 लाख टन और सोयाबीन तेल का आयात 2.99 लाख टन रहा।
एक मार्च तक, वनस्पति तेल का स्टॉक 18.72 लाख टन था, जो पिछले महीने से 85,000 टन ज़्यादा है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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