नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने शुक्रवार को बताया कि फसल वर्ष 2025-26 के लिए भारत का गेहूं उत्पादन 11 से 12 करोड़ टन के बीच रहने की संभावना है। प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के कारण यह अनुमान लगाया गया है।
रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने हाल में मौसम से हुए नुकसान को ध्यान में रखते हुए गेहूं उत्पादन का अनुमान 11 करोड़ 6.5 लाख टन लगाया है। यह आंकड़ा फसल वर्ष 2024-25 में उत्पादित 10 करोड़ 96.3 लाख टन से थोड़ा ही ज़्यादा है।
कृषि मंत्रालय ने खराब मौसम की मार पड़ने से पहले, उत्पादन का अनुमान 12 करोड़ 2.1 लाख टन लगाया था, जो पिछले वर्ष के 11 करोड़ 79.4 लाख टन से अधिक था।
फेडरेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चोपड़ा ने कहा, ‘‘जहां फेडरेशन ने गेहूं उत्पादन का अनुमान 11 करोड़ टन लगाया है, वहीं बारिश से पहले कृषि मंत्रालय द्वारा दिया गया आंकड़ा 12 करोड़ टन था।’’
सरकार ने इस सत्र में अब तक 1.64 करोड़ टन गेहूं की खरीद की है और अपने खरीद लक्ष्य को पहले के तीन करोड़ टन से बढ़ाकर 3.45 करोड़ टन कर दिया है।
मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और उत्तराखंड में खरीद के लक्ष्य बढ़ा दिए गए हैं, और सरकार ने उत्तराखंड को छोड़कर बाकी सभी चार राज्यों के लिए खरीद के नियमों में ढील दी है।
सरकार ने चरणबद्ध तरीके से 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी है।
हालांकि, चोपड़ा ने कहा कि कीमतों में समानता से जुड़ी दिक्कतों के कारण निर्यात की गति धीमी रही है।
सचिव ने बताया कि सरकार अगले दो महीनों के भीतर गेहूं के लिए एक नई ‘खुले बाजार की बिक्री योजना’ नीति जारी करने की योजना बना रही है। उन्होंने मिल मालिकों से कहा कि वे अपनी आपूर्ति के लिए इस योजना पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय गेहूं की खरीद में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।
भाषा राजेश राजेश पाण्डेय
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