व्यक्तिगत दिवाला पेशेवरों को सौ करोड़ रुपये तक के कर्ज मामलों को संभालना चाहिए: अध्ययन
व्यक्तिगत दिवाला पेशेवरों को सौ करोड़ रुपये तक के कर्ज मामलों को संभालना चाहिए: अध्ययन
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) व्यक्तिगत दिवाला पेशेवरों को 100 करोड़ रुपये तक के कर्ज वाले दिवाला मामलों को संभालना चाहिए जबकि बड़े मामलों को संस्थागत इकाइयों को सौंपा जाना चाहिए। एक अध्ययन में यह सिफारिश की गई है।
आईसीएआई के भारतीय दिवाला पेशेवर संस्थान द्वारा ‘आईपी/आईपीई के लिए नियामकीय ढांचे में सुधार और पेशे को सुदृढ़ बनाना’ शीर्षक वाले अध्ययन में ये सिफारिशें की गई हैं।
संस्थान ने बयान में कहा कि यह अध्ययन अपर्याप्त सूचना प्रवाह, जटिल परिसंपत्ति मूल्यांकन, हितधारकों के बीच टकराव और संसाधनों की कमी जैसी दिवाला पेशेवरों (आईपी) के सामने आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, 100 करोड़ रुपये तक के कर्ज वाले छोटे मामलों को व्यक्तिगत दिवाला पेशेवरों (आईपी) के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए जबकि 500 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े तथा जटिल मामलों को विशेष रूप से दिवाला पेशेवर संस्थाओं (आईपीई) को सौंपा जा सकता है।
इसमें कहा गया, ‘‘ मध्यम श्रेणी (100 करोड़ रुपये से 500 करोड़ रुपये तक) को संबंधित पक्षों की सुविधा पर छोड़ा जा सकता है।’’
दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की रूपरेखा में दिवाला पेशेवरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के समयबद्ध एवं बाजार-आधारित समाधान का प्रावधान करता है।
अध्ययन में यह भी सुझाव दिया गया कि दिवाला पेशेवरों की भूमिका को आईबीसी से आगे बढ़ाकर बैंकिंग क्षेत्र (एनपीए खातों के पुनर्गठन) और कॉरपोरेट क्षेत्र (सलाहकार सेवाओं) तक विस्तारित किया जाए।
इसके अलावा, आईपी के लिए अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष से बढ़ाकर 75 वर्ष करने की भी सिफारिश की गई है।
यह संस्थान भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (आईसीएआई) द्वारा प्रवर्तित है।
भाषा निहारिका रमण
रमण

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