टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के लिए उद्योग जगत श्रमिकों के साथ निष्पक्ष रूप से बांटे लाभ: सीईए
टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के लिए उद्योग जगत श्रमिकों के साथ निष्पक्ष रूप से बांटे लाभ: सीईए
नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने सोमवार को कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि टिकाऊ तभी हो सकती है, जब इसका लाभ श्रमिकों और कंपनियों के बीच निष्पक्ष रूप से बंटे।
उन्होंने जोर देकर कहा कि निष्पक्षता कोई खैरात नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और टिकाऊ बाजार अर्थव्यवस्था की अनिवार्य शर्त है।
उन्होंने यहां ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन (एआईएमए) के एक कार्यक्रम में मुख्य भाषण देते हुए कहा, ‘‘आर्थिक वृद्धि देश को तभी बदलती है जब इसे काम करने वालों और पूंजी लगाने वालों के बीच ईमानदारी से साझा किया जाए।’’
सीईए ने तर्क दिया कि निष्पक्षता पर बहस को श्रमिकों और व्यवसायों के बीच चयन के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके बजाय, दोनों एक ही आर्थिक समझौते का हिस्सा हैं, जहां पूंजी को उचित प्रतिफल पाने का अधिकार है, वहीं श्रमिकों को भी अपने काम से पैदा होने वाली समृद्धि में सार्थक हिस्सा मिलना चाहिए।
नागेश्वरन ने कहा, ‘‘निष्पक्षता निश्चित रूप से कोई खैरात नहीं है।’’ उन्होंने आगे कहा कि एक टिकाऊ बाजार आखिरकर इस बात पर निर्भर करता है कि उपभोक्ताओं के पास कंपनियों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने के लिए पर्याप्त क्रय शक्ति हो।
उन्होंने कहा, ‘‘एक स्वस्थ बाजार को ऐसे ग्राहकों की जरूरत होती है जो खरीदारी करने में सक्षम हों, और वे ग्राहक किसी न किसी के कर्मचारी ही होते हैं।’’
सरकार की भूमिका पर नागेश्वरन ने कहा कि उसे सस्ती बिजली, आसानी से जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए और अनुपालन बोझ कम करना चाहिए ताकि कारोबार करने की लागत घट सके।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय

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