विशेष इस्पात के लिए पीएलआई 1.2 के तहत 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश प्रतिबद्धता

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विशेष इस्पात के लिए पीएलआई 1.2 के तहत 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की निवेश प्रतिबद्धता

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  • Publish Date - February 9, 2026 / 07:31 PM IST,
    Updated On - February 9, 2026 / 07:31 PM IST

नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) केंद्रीय इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने सोमवार को विशेष इस्पात के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) का तीसरा चरण पेश किया। इसका मकसद उन्नत अलॉय स्टील की क्षमता 87 लाख टन बढ़ाना है।

इस बारे में, पीएलआई 1.2 के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की सेल के सलेम स्टील संयंत्र समेत 55 कंपनियों और मंत्रालय के बीच करीब 85 समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें 11,887 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जतायी गयी है।

कुमारस्वामी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘पीएलआई 1.2 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के साथ एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विशेष इस्पात परिवेश बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। यह योजना उन्नत और रणनीतिक इस्पात उत्पाद में घरेलू क्षमता बनाने को बढ़ावा देकर ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत की दो प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाती है।’’

मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से वित्त वर्ष 2030-31 तक 87 लाख टन विशेषीकृत इस्पात क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। इससे इलेक्ट्रिकल स्टील, अलॉय और स्टेनलेस स्टील, कोटेड उत्पादों जैसे महंगे इस्पात खंड में और रणनीतिक क्षेत्र के लिए जरूरी इस्पात ग्रेड खंड में देश की क्षमता में काफी बढ़ोतरी होगी।

मंत्री ने कहा कि पीएलआई योजना का तीसरा चरण उद्योग की मजबूत मांग और विशेषीकृत इस्पात में लगातार क्षमता बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए शुरू किया गया है। यह वाहन, रेलवे, रक्षा, इलेक्ट्रिकल उपकरण और वैमानिकी जैसे क्षेत्र के लिए जरूरी है।

पांच साल के समय में चार प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक की प्रोत्साहन दर के साथ, यह योजना निवेश, प्रौद्योगिकी उन्नयन और मूल्य वर्धन को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय विनिर्माण को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में जोड़ने के लिए तैयार की गई है।

उन्होंने कहा कि पीएलआई 1.2 घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर, विदेशी मुद्रा बचाकर और भारत को अत्याधुनिक स्टील के एक भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता के तौर पर स्थापित करके संरचनात्मक कमी को दूर करने की कोशिश करती है।

इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक ने कंपनियों से योजना की समयसीमा पर कायम रहने और इसका फायदा उठाने की अपील की, जो विशेष स्तर के इस्पात ग्रेड के उत्पादन पर प्रोत्साहन देती है।

उन्होंने कहा कि योजना की समयसीमा को और नहीं बढ़ाया जाएगा।

पौंड्रिक ने कहा कि भारत की स्थापित इस्पात क्षमता अभी 21.8 करोड़ टन सालाना है। यह मौजूदा वित्त वर्ष में ही 1.8 करोड़ टन सालाना बढ़ गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश 2031 में 30 करोड़ टन सालाना इस्पात विनिर्माण क्षमता का लक्ष्य आराम से हासिल कर लेगा और शायद 2035-36 तक 40 करोड़ टन सालाना तक पहुंच जाएगा।

भाषा रमण अजय

अजय