आरबीआई ने एमएसई के लिए गारंटीमुक्त ऋण की सीमा 20 लाख रुपये तक बढ़ाई

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आरबीआई ने एमएसई के लिए गारंटीमुक्त ऋण की सीमा 20 लाख रुपये तक बढ़ाई

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  • Publish Date - February 9, 2026 / 08:52 PM IST,
    Updated On - February 9, 2026 / 08:52 PM IST

मुंबई, नौ फरवरी (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए ऋण संबंधी निर्देशों में संशोधन की घोषणा की। छोटे व्यवसायों के लिए ऋण की पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए ‘गारंटीमुक्त’ ऋण की अनिवार्य सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है।

संशोधित दिशानिर्देशों में कहा गया है, ‘‘बैंकों को आदेश दिया जाता है कि वे एमएसई क्षेत्र की इकाइयों को दिए जाने वाले 20 लाख रुपये तक के ऋण के मामले में कोई ‘गारंटी’ स्वीकार न करें। साथ ही, बैंकों को सलाह दी जाती है कि वे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत वित्तपोषित सभी इकाइयों को भी 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी वाला ऋण प्रदान करें।’’

आरबीआई ने कहा, ‘‘बैंक अपनी आंतरिक नीति के अनुसार, एमएसई इकाइयों के पिछले बेहतर प्रदर्शन के आधार पर 25 लाख रुपये तक के ऋण के लिए सुरक्षा ‘गारंटी’ की आवश्यकता को समाप्त करने का निर्णय ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त, बैंक जहां भी लागू हो, ‘क्रेडिट गारंटी योजना’ (सीजीएमई) के कवर का लाभ भी उठा सकते हैं।’

संशोधित निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि ऋण लेने वाला व्यक्ति बिना गारंटी वाली सीमा तक के ऋण के लिए अपनी मर्जी से सोना या चांदी गिरवी रखता है, तो इसे उपरोक्त नियमों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

इन संशोधनों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए आरबीआई ने कहा कि इसका उद्देश्य उन सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण वितरण की अंतिम कड़ी को मजबूत करना है, जिनके पास गारंटी के तौर पर गिरवी रखने के लिए सीमित संपत्ति है।

ये संशोधित निर्देश एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले शुक्रवार को मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान इन बदलावों का संकेत दिया था। एमएसएमई क्षेत्र के ऋण संबंधी इन मुख्य निर्देशों का आखिरी बार जुलाई, 2025 में अद्यतन किया गया था।

भाषा

सुमित अजय

अजय