एमडीआर पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी, डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश जरूरी: मल्होत्रा

एमडीआर पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी, डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश जरूरी: मल्होत्रा

एमडीआर पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी, डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश जरूरी: मल्होत्रा
Modified Date: August 5, 2026 / 05:03 pm IST
Published Date: August 5, 2026 5:03 pm IST

मुंबई, पांच अगस्त (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल ‘इंतजार करें और देखें’ का रुख अपनाना उचित होगा।

डिजिटल भुगतान से जुड़े कानूनों में सरकार के प्रस्तावित संशोधनों के बाद मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होने की अटकलों के बीच उन्होंने यह बात कही।

‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ व्यापारियों से लिया जाने वाला डिजिटल भुगतान शुल्क है। यह वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान प्रसंस्करण करने पर व्यापारी से बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता वसूलते हैं।

मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के बाद मल्होत्रा ने संवाददाताओं कहा कि डिजिटल भुगतान जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचा में निवेश जरूरी है और इसकी लागत किसी न किसी को उठानी होगी। इसके लिए दो विकल्प हैं। पहला, आम जनता कर के माध्यम से इसकी लागत उठाए। दूसरा, उपयोगकर्ता भुगतान मॉडल (यूजर पे) के तहत ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ लगाया जाए।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘फिलहाल सरकार डिजिटल भुगतान से जुड़े कानूनों में संशोधन ला रही है। हमारा ध्यान इस सार्वजनिक अवसंरचना को और मजबूत तथा अधिक दक्ष बनाने पर है। आगे क्या होगा, इसके लिए इंतजार करना होगा।’’

देश में एमडीआर का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। बैंक और भुगतान उद्योग से जुड़े अन्य पक्ष इसे लागू करने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार ने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। वहीं यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) जैसे डिजिटल भुगतान मंच का उपयोग लगातार तेजी से बढ़ रहा है।

बाजार के कुछ जानकारों का मानना है कि भविष्य में व्यापारी और ग्राहक के बीच एक निश्चित सीमा से अधिक मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू किया जा सकता है, जबकि व्यक्तियों के बीच लेनदेन को इससे बाहर रखा जा सकता है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डिजिटल भुगतान सेवा की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी।

उन्होंने कहा कि ‘यूजर पे’ सिद्धांत के तहत लेनदेन करने वाले व्यापारी या उपयोगकर्ता से एमडीआर के रूप में शुल्क लिया जाता है। हालांकि, यदि एमडीआर नहीं भी लगाया जाता है, तब भी इस व्यवस्था की लागत अंततः आम जनता करों के माध्यम से वहन करती है।

मल्होत्रा ने कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें डिजिटल भुगतान अवसंरचना में निवेश जारी रखना है और इसके लिए साधन तलाशने होंगे। वह चाहे एमडीआर के जरये हो या फिर किसी अन्य माध्यम से। इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करना होगा।’’

आरबीआई के डिप्टी-गवर्नर रोहित जैन ने कहा कि केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (ई-रुपया) का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और आरबीआई बैंकों को इसके नए उपयोग विकसित करने के लिए आग्रह कर रहा है।

उन्होंने कहा कि एकीकृत ऋण इंटरफेस (यूएलआई) मंच के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कर्ज मंजूरी और वितरण की प्रक्रिया को तेज करना है।

जैन ने कहा कि फिलहाल 12 राज्यों ने अपने भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर लिया है, जो यूएलआई मंच की सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। कई अन्य राज्य भी इस दिशा में काम कर रहे हैं।

भाषा रमण अजय

अजय


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